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बिहार के लोग पी रहे जमशेदपुर में बनी नकली शराब

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जमशेदपुर। सरकारी कंपनियों में बनी शराब की हर बोतल में उसका बैच नंबर यानि किस साल वह बना है उसका रजिस्ट्रेशन नंबर यानि कंपनी की पूरी जानकारी सहित इसका भी उल्लेख होता है कि इसे कहां बेचा जाएगा। लेकिन उत्पाद विभाग की माने तो टाटानगर रेलवे स्टेशन से जब्त शराब में ये सारी जानकारियां नहीं है। ऐसे में प्रथम दृष्टता यह मान कर चला जा रहा है कि जब्त माल नकली शराब हो सकती है। आपको बता दें कि बिहार में शराबबंदी है और शराब के शौकीन अपनी शौक पूरा करने के लिए दूसरे राज्यों का रुख करते हैं। साथ ही शराब विक्रेता भी पड़ोसी राज्यों से अवैध तरीके से माल लाकर बेच कर मोटा मुनाफा कमाते हैं। टाटानगर स्टेशन में पिछले दिनों यही हुआ। दुर्ग से चलकर राजेंद्र नगर टर्मिनल को जाने वाली 03287 साउथ बिहार स्पेशल ट्रेन के समय एक व्यक्ति दो बड़े थैलों को लेकर टाटानगर स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या एक पर पहुंचा। इस दौरान सामानों की जांच करने बैठी महिला कांस्टेबल एसके मीणा की नजर उस पर पड़ी और उसने यात्री से अपना सामान जांच कराने के लिए स्कैनिंग मशीन में रखने को कहा। इससे वह यात्री घबरा गया और पकड़े जाने के डर से उसने पहले स्कैनिंग मशीन में अपने दो थैले रख दिए। जब महिला कांस्टेबल ने सामान जांच करने की ओर ध्यान दिया तो मौके का फायदा उठाकर वह यात्री फरार हो गया। जांच में महिला कांस्टेबल को थैले में कांच की बोतलें दिखी। उन्होंने तुरंत इसकी सूचना अपने वरीय अधिकारियों को दी। जांच प्रीमियम ब्लू के नौ बोतल और बॉट्मस अप के 27 बोतल सहित कुछ 750 एमएल के कुल 36 बोतलें बरामद की गई। आरपीएफ की टीम ने भी दुकानों में उन दोनों बोतलों की कीमत का पता किया तो पता चला कि उस तरह की शराब जमशेदपुर में नहीं बेची जाती है। ऐसे में आरपीएफ व अबकारी विभाग यह मान कर चल रही है कि सारा शराब नकली है और इसे जमशेदपुर में ही बनाकर बिहार में खपाने की तैयारी हो रही है। अब आरपीएफ की टीम उक्त यात्री की तलाश कर रही है जो माल छोड़कर भागा था।

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