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डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी यूजी और पीजी की आॅनलाइन परीक्षा14 जून से

रांची: कोरोना महामारी के मद्देनजर राज्य के विश्वविद्यालयों में आॅनलाइन परीक्षाएं आयोजित की जा रही है , तो वहीं कुछ विभागों के विद्यार्थियों को प्रमोट भी किया जा रहा है ,इसी कड़ी में डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी द्वारा यूजी और पीजी की आॅनलाइन परीक्षा की तिथि घोषित कर दी गई।यह परीक्षाएं 14 जून से शुरू होंगी। डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ सत्यनारायण मुंडा ने कहा कि सबसे पहले फिफ्थ सेमेस्टर ग्रेजुएशन और थर्ड सेमेस्टर पीजी की एग्जाम ली जाएगी, यह परीक्षाएं आॅनलाइन ली जाएगी । हम लोग सभी छात्रों का ख्याल कर रहे हैं किसी भी छात्र का कोई भी प्रॉब्लम न हो इस तरीके का हमने किया है। परीक्षाएं हम लोग सभी का लेंगे जो अभी सक्षम हैं उनका परीक्षा पहले लिया जाएगा जिनमे बीबीए, बीसीए, एमसीए ,एमएमसीए ,एमएससीआईटी, कॉमर्स ,अंग्रेजी विषय के छात्र तैयार हैं पहले इन विद्यार्थियों का परीक्षा लिया जा रहा है। डॉ श्याम प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी विश्वविद्यालय के 14 तारीख से लिए जाने वाले आॅनलाइन परीक्षा पर छात्र और छात्र संगठन के विद्यार्थियों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है, डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी की बीजेएमसी प्रथम सेमेस्टर की छात्रा अपर्णा झा का कहना है कि कोरोना महामारी को देखते हुए विश्वविद्यालय का यह उचित निर्णय है। पढ़ाई को सुचारू ढंग से चलाने के लिए आॅनलाइन पढ़ाई ही एक सहारा है। लेकिन हमें इस बात पर भी ध्यान देना होगा कि विश्वविद्यालय में कई ऐसे छात्र हैं जिनके पास एंड्रॉयड मोबाइल नहीं है कई छोटे-छोटे स्थानों से भी छात्र आते हैं जहां नेटवर्क की भारी समस्या है ऐसे में विश्वविद्यालय को इन जैसे छात्रों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए ताकि इनकी भी परीक्षा ली जा सके इनका भी साल बर्बाद ना हो।वही एबीवीपी के छात्र नेता शिवम सिन्हा का कहना है कि वर्तमान समय को देखते हुए आॅनलाइन एग्जाम ही एकमात्र विकल्प बचता है। परंतु आॅनलाइन एग्जाम देने में बच्चों को कई तरह की समस्या आएंगे , ऐसे बच्चों के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को इस चीज पर ध्यान रखना चाहिए कि एग्जाम देते समय बच्चों को किसी प्रकार की समस्या ना हो और अगर किसी बच्चे का एग्जाम छूट जाता है तो वैसे बच्चों की भी व्यवस्था कॉलेज प्रशासन को करनी चाहिए। वहीं झारखंड छात्र मोर्चा से जुड़े छात्र अजीत विश्वकर्मा का कहना है कि अगर विश्वविद्यालय प्रशासन को यूजीसी का गाइडलाइन आया हो तो पिछले वर्ष की तरह भी छात्रों को अगले सेमेस्टर में प्रमोट कर देना चाहिए । क्योंकि कई ऐसे विद्यार्थी हैं जो ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं जिनके पास में न इंटरनेट ना मोबाइल की सुविधा है। वहीं विद्यार्थियों के समस्या पर कुलपति ने कहा कि अगर जनजातीय क्षेत्रीय भाषा विभाग में या किसी विद्यार्थियों को दिक्कत आएगी आॅनलाइन एग्जाम में तो हम लोग इसके लिए भी व्यवस्था करेंगे।

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