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कोरोनाकाल ने तोड़ी मूर्तिकारों की कमर, नए सरकारी आदेश के बाद हालत बदहाल

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धनबाद: कोरोनाकाल की मार से जूझ रहे कोयलांचल धनबाद के मूर्तिकारों की कमर सरकार के द्वारा जारी नयी गाइडलाइन ने तोड़ कर रख दी है। दुर्गोत्सव के महज कुछ सप्ताह पूर्व जारी सरकार के नियमों ने महीनों से कड़ी मेहनत कर रहे मूर्तिकारों की मेहनत पर पानी फेर दिया है।अब मूर्तिकार पशोपेश में है की अंतिम चरण में निमार्णाधीन बड़ी मूर्तियों का क्या होगा। हालात यह हो गए हैं कि कर्ज भरपाई के साथ अब घर चलाने के लिए भी मुश्किल आन पड़ी है।

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नए गाइडलाइन नें मूर्तिकारों को बना दिया कर्जदार
मूर्तिकार दुगार्पूजा से उम्मीद लगाए थे की कर्ज उतर जाएगा लेकिन नए आदेश से उनकी यह उम्मीदें भी टूट गईं हैं। मूर्तिकार पशोपेश में हैं कि अब कर्ज कैसे उतरेगा। गणेश महोत्सव और दुगार्पूजा मूर्तिकारों के लिए वर्ष भर की आजीविका लेकर आती हैं। इन त्योहारों से मूर्तिकारों का घर चलता है। लेकिन कोरोनाकाल नें त्योहारों पर प्रतिबंध लगा दिया है। पूजा पंडालों में 5 फिट की प्रतिमा के प्रशासनिक आदेश पर मूर्तिकारों के माथे पर चिंता की लकीर खींच गई है।
आर्डर कैंसिल होने से परेशान है मूर्तिकार
मूर्तिकार दुलाल पाल ने बताया कि कुछ माह पूर्व गणेश महोत्सव के दौरान बनाई गई गणेश की मूर्ति रखी रह गईं और अब दुगार्मूर्ति के बिक्री पर संशय बन गया है। इससे मूर्तिकार काफी चिंतित है। मूर्तिकारों की मानें तो उन्होंने कुछ माह पूर्व ही दर्जनों बड़ी मूर्तियां बनाकर रख ली हैं। एक बड़ी मूर्ति के निर्माण में कुल लागत 15 से 20 हजार की आती है। अब सरकार के द्वारा पूजा से महज 25 दिन पहले आदेश जारी हुआ है कि प्रतिमा की ऊंचाई 5 फिट से ज्यादा नही होनी चाहिए। ऐसे में उनको बड़ी मूर्तियो के मिले आर्डर कैंसिल हो गए हैं। उन्होंने बताया कि अब महज 25 दिनों के भीतर हम दुबारा प्रतिमा कैसे बना सकते है साथ ही बारिश के कारण मूर्तिकारों को दुर्गा प्रतिमा को सुखाने में भी काफी कठिनाईयो का सामना करना पड़ रहा है।जिले में लगभग दर्जनों मूर्तिकार हैं जो सिर्फ मूर्तियां बनाने का काम करते हैं। दुगार्पूजा को लेकर जारी सरकारी गाइडलाइन के बाद से इन मूर्तिकारों को संकट में लाकर खड़ा कर दिया है।वही कई मूर्तिकारों नें बताया कि घाटे की भरपाई को लेकर हम काफी चिंतित है। ब्याज पर भी रुपए लिए हैं। ऐसे में अगर बनाई गई छोटी मूर्तियां भी न बिकीं तो वह कहीं के नहीं रहेंगे।

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