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 संघचालक मोहन भागवत जी के संबोधन से सम्प्रदायिक एकता को मिली मजबूती: मौलाना अशरफी

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भारत को जो मादरे वतन मानते हैं, वे सभी भारत मां के सपूत हैं
कयूम खान
लोहरदगाः मुस्लिम राष्ट्रीय मंच सह उलेमा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय सह संयोजक मौलाना जियाउल हक अशरफी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मार्गदर्शक डॉक्टर इंद्रेश कुमार के संरक्षण में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के वैचारिक समन्वय एक पहल का खाजा इफ्तिखार अहमद द्वारा लिखी गई किताब का लोकार्पण परम आदरणीय डॉ मोहन भगवत जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा विगत04 जुलाई को संपन्न हुआ। उन्होंने हर एक भारतीय को जो शब्दों का तोहफा दिया है, उससे आरएसएस के प्रति अल्पसंख्यकों में जो डर था वह अब पाट दिया गया है।
हमारे यहां जो भी भारतीय लोग मौजूद हैं, चाहे वह हिंदू हो, मुस्लिम हो, सिख हो, ईसाई हो या अन्य उनमें डीएनए एक ही हैं। संविधान सभी की रक्षा करती है। अगर कोई भी कहे कि मुस्लिम यहां से यानी भारत छोड़कर चले जाएं, तो वह व्यक्ति हिंदू नहीं है। और यह विचारधारा भी हमारे यहां नहीं है क्योंकि सब एक ही रस्सी के गांठ हैं। सब एक और नेक हैं पर आज तक ऐसा नहीं हुआ इसका सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक करने वाले लोग जिम्मेदार हैं।
देश हमारा है, समाज हमारा है, डर बैठाए जाने से चक्का सीधा नहीं होता, बल्कि उल्टे ही गाड़ी चलने लगती है। गाे माता हमारा पूजनीय जरूर है, मगर मॉबलिंचिंग बिल्कुल कहीं से भी ठीक नहीं है। हिंदू समाज का भी आत्मविश्वास बढ़े, एकता विश्वास से होगी, मुस्लिमों को डराने से नहीं और न ही उनके डरने से। जो भारत को मादरे वतन मानता है, वह भारत मां का सपूत है। चाहे जो भी हो हर एक समाज भारत का समाज है। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने एकता की दिशा में जो पहल की है, उसकी खूब तारीफें कीं और सब को मिलकर भारत को विश्वगुरु बनाना है। वह हौसले के साथ आगे बढ़ेंगे।
सर संघचालक जी की लवोलुआब  सुनहरे शब्दों में तहरीर किए जाने के तर्ज पर था। शायराना अंदाज में भी नजर आए और यह बात साबित हो रही थी के हौसले जिनके जवा हैं, वह फलक तक पहुंचे, सारी दुनिया को यह पैगाम सुनाया जाए, एक वाक्य भी सर संघचालक जी ने रखा जिसे अक्सर ओलेमा जलसों में पेश करते हैं। एक शख्स ईल्मी सलाहियत के मुताबिक इतनी ज्ञानी नहीं था, वह अपने अकलो दिमाग के मुताबिक जो उसकी अकल थी, अल्लाह ईश्वर को याद कर रहा था। अपने ईश्वर से इतनी मोहब्बत थी कि वह मोहब्बत में डूब कर अल्लाह ईश्वर को पुकारता है और कहता ए मालिक ए ईश्वर तू मिलता तो मैं तेरे सर पर कंघा करता, तेल लगाता, इत्र सुरमा काजल खिदमत करता।
इसी बीच एक फकीर की गुजर हो रही थी, फकीर गुस्से के आलम में कहा ए नादान तुम्हें पता नहीं कि वह खुदा ईश्वर तमाम चीजों से पाक है। उसका कोई आकार नहीं वह एक शक्ति है, जिसका कोई आकार नहीं जो देख लेता है बोल लेता है और उसके हुक्म से तमाम चीजें होती है। ईश्वर अल्लाह की तरफ से आवाज आई अगर यह मेरा बंदा इसी में खुश है, तो मैं भी खुश हूं और वह फकीर भी इस बात पर सरखम हो गया। इस वाक्य की रोशनी में सरसंघचालक जी का भी कहना था, जो जिस हालत में रहें मोहब्बत पैदा करें। क्योंकि मोहब्बत सबको पसंद है। सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत जी की वाणी और मार्गदर्शक मुस्लिम राष्ट्रीय मंच डॉ इंद्रेश कुमार जी की कार्यों को सलाम। जैसा कि तमाम मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के वफादार पदाधिकारियों कार्यकर्ताओं ने की सलाम।
मौलाना अशरफी ने कहा यह एक बड़ी दिलचस्प चीज है कि हम हिंदुस्तानी हैं, हिंदुस्तान के पक्षधर हैं कि हमारा जो कार्य है, उसमें संघ और संगठन हमें उस कार्य में लगाती है। मुस्लिमों की वोट की राजनीति जिसमें टूट और फूट हो, दोरंगी नीति हो, वह भारत और भारतीयों के हक में नहीं है। लेकिन हमारे नीयत और नियति दोनों एक हैं। मौलाना अशरफी ने बताया कि खाजा इफ्तेखार अहमद की लिखी हुई किताब ‘वैचारिक समन्वय एक पहल का’ बाजार में आम होगी।
इस वर्चुअल सेमिनार मीटिंग में शरीक होने वाले दीगर राज्यों के एलावे अपने झारखंड राज्य के अनेकों जिलों के कोने-कोने में शिरकत करने वाले मुस्लिम राष्ट्रीय मंच एवं प्रकोष्ठों के पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं को बधाई दी। लोहरदगा जिला के नवनियुक्त मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के जिला संयोजक टीपू खान खुश दिली के साथ शिरकत की तथा उलेमा प्रकोष्ठ के पुराने पदाधिकारी कार्यकर्तागण प्रकोष्ठ के मौलाना शाकिर मौलवी, अब्दुल मुबीन, हाफिज जुनेद, हाफिज साबिर, नासिर अंसारी, इबरार अंसारी तथा पलामू प्रमंडल के महताब आलम इत्यादि ने प्रोग्राम को कामयाब बनाने में भूमिका निभाई।
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