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कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश अध्यक्ष शकील अख्तर अंसारी को पर अनुशासनहीनता का आरोप, पद से हटाने की मांग 

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राष्ट्रीय अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी से अनुमति के बगैर कमिटी की घोषणा मान्य नहीं: वारिस कुरैशी
कयूम खान 
लोहरदगा: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग स्टेट कोऑर्डिनेटर सह प्रवक्ता वारिस कुरैशी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी में अल्पसंख्यक विभाग अत्यंत महत्वपूर्ण है। झारखंड में अल्पसंख्यकों की आबादी 19.3% पॉइंट ( 2011 जनगणना के अनुसार) है। जिस पर अधिकांश कांग्रेस की पकड़ मजबूत है। प्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग में अध्यक्ष का कार्यकाल 3 वर्षों का निर्धारित है। वर्तमान अध्यक्ष गत 6 वर्षों से पद पर बने हुए हैं, जबकि 2018 में तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष नदीम जावेद ने प्रदेश अध्यक्ष शकील अख्तर अंसारी की कार्यकारिणी, प्रदेश एवं जोनल कमेटी को उनके गलत क्रियाकलाप के कारण भंग कर दिया था।
प्रदेश अध्यक्ष शकील अख्तर अंसारी ने 18 नवंबर 2020 को गिरिडीह, धनबाद एवं बोकारो जिला का कार्यकारी अध्यक्ष मनोनीत किया था।
जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष का अनुमोदन प्राप्त होने का दावा किया था। लेकिन 4 दिन बाद ही 22 नवंबर 2020 को कांग्रेस अल्पसंख्यक के राष्ट्रीय अध्यक्ष नदीम जावेद ने अनुमोदन की बात को नकारते हुए मनोनयन को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया था। विगत 26 जून 2021 को शकील अख्तर अंसारी ने झारखंड ने 90 नए सदस्य कार्यकारिणी की घोषणा कर दी। जबकि उन्होंने नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी से इसकी अनुमति भी नहीं ली और ना ही राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं झारखंड अल्पसंख्यक प्रभारी डॉक्टर वसीम सागर आजमी से कमेटी का अनुमोदन भी प्राप्त नहीं किया।
प्रदेश अध्यक्ष शकील अख्तर अंसारी ने सीधे कमेटी की घोषणा अखबारों में प्रकाशित कर दिया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश अल्पसंख्यक प्रभारी डॉक्टर वसीम सागर आजमी ने 28 जून 2021 को मीडिया में बयान देकर अध्यक्ष के द्वारा घोषित कमिटी को अवैध करार दिया। उन्होंने इसे अनुशासनहीनता का मामला बताया। झारखंड प्रदेश में गत कई वर्षों से मॉब लिंचिंग, लव जिहाद, मदरसों का सत्यापन के नाम पर मदरसा शिक्षकों का वेतन रोका जाना, छात्रवृत्ति, एनआरसी, सीएए, एनपीआर, धर्मांतरण, पत्थलगड़ी जैसे ज्वलंत मुद्दों से झारखंड प्रदेश जूझता रहा। लेकिन प्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष ने इन विषयों पर कभी गंभीरता नहीं दिखाई, ना ही चरणबद्ध आंदोलन किया।
अल्पसंख्यक समस्याओं के समाधान हेतु कभी भी संबंधित मंत्री एवं संबंधित विभाग के सचिवों से वार्ता नही किया, और ना ही किसी को करने दिया। कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग निष्क्रिय पड़ा रहा जिससे अल्पसंख्यक समुदाय में कांग्रेस पार्टी के प्रति नकारात्मक छवि बनती जा रही है, जो पार्टी के लिए एक गलत संकेत है।
प्रदेश अल्पसंख्यक विभाग की समस्या से रूबरू होने के बावजूद नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी जी भी वेट एंड वॉच की स्थिति मैं हैं, जिस से प्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग की स्थिति असमंजस सी बनी हुई है। ऐसे निरंकुश अल्पसंख्यक प्रदेश अध्यक्ष को हटाने हेतु मैं प्रदेश अध्यक्ष डॉ रामेश्वर उरांव एवं विधायक दल के नेता आलमगीर आलम जी से इस संबंध में विचार विमर्श कर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी जी से दिल्ली में जाकर मिलूंगा, ताकि झारखंड प्रदेश अल्पसंख्यक कांग्रेस को नया अध्यक्ष मिल सके।
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