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बिहार में पंचायती राज प्रतिनिधियों के कार्यकाल को नहीं बढाये जाने जाने पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी देगी धरना

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिवमंडल ने पंचायती राज प्रतिनिधियों के कार्यकाल को नहीं बढाये जाने एवं उसके बदले परामर्ष समिति के गठन करने की राज्य सरकार के अलोकतांत्रिक फैसले का विरोध करती है और इसके खिलाफ तथा पंचायती राज प्रतिनिधियों के कार्यकाल को चुनाव होने तक विस्तार करने की मांग को लेकर पूर्व घोषित 03 जून, 2021 को राज्य के तमाम प्रखण्ड, मुख्यालय, पार्टी कार्यालयों, पंचायत, गांव में धरना/प्रदर्षन को करने का फैसला लिया है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने राज्य सरकार से मांग करती है कि राज्य सरकार अपने फैसलों पर पुर्नविचार करे और पंचायती राज के प्रतिनिधियों के कार्यकाल को चुनाव होने तक विस्तार करे।
पार्टी की राज्य सचिवमंडल की ओर से जारी बयान की जानकारी देते हए पार्टी के राज्य सचिव राम नरेष पाण्डेय ने कहा है कि राज्य सरकार के कैबिनेट ने फैसला लिया है कि राज्यपाल की मंजूरी के बाद तय किया जायेगा कि परामर्ष समिति के कौन-कौन सदस्य होंगे यानि सरकार मनमाने ढ़ंग से परामर्ष समिति में सदस्यों का मनोनयन करेगी जो शासक दल का कठपुतली होगा। राज्य सरकार की यह कार्रवाई अलोकतांत्रिक है।
उन्होंने कहा है कि वत्र्तमान पंचायती राज व्यवस्था में जनता द्वारा चुने गये प्रतिनिधि को अधिकार दिये जाने से बिहार पंचायती राज अधिनियम- 2006 जिसमें समाज के कमजोर तबकों, महिलाओ, अत्यन्त पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति-जनजाति को जो अधिकार एवं भागीदारी सुनिष्चित की गयी है उसका हरण नहीं बल्कि बरकरार रहेंगा।
श्री पाण्डेय ने आरोप लगाया है कि त्रि-स्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों का चुनाव समय पर कराना पूरी की पूरी राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग की जवाबदेही है। पाँच राज्यों की विधान सभा एवं उत्तर प्रदेष ग्राम पंचायत के चुनाव हुये लेकिन बिहार में बैलेट पेपर और ईवीएम की नुराकुष्ती में ग्राम पंचायत चुनाव को साजिष के तहत टाला जाता रहा। पंचायती राज संस्था के साथ अन्याय नहीं हो इसकी जवाबदेही राज्य सरकार की है।
भाकपा के राज्य सचिव राम नरेष पाण्डेय ने पार्टी के तमाम इकाईयों, समर्थकों, हमदर्दों एवं जनता के सभी तबकों से आह्वान किया है कि पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार 03 जून, 2021 को कोरोना गाईड लाइन तथा लाॅकडाउन के नियम को पालन करते हुए धरना/प्रदर्षन एवं अन्य जनकार्रवाई के माध्यम से पंचायती राज के अस्तित्व को कायम रखने हेतु सरकार पर जन दवाब बनावें।

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