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सनसनी नहीं, सटीक खबर

कोयला तस्करी पर नई इबारत लिखने को तैयार कोयलांचल धनबाद

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अभी नही तो फिर कभी नहीं की तर्ज पर दर्जनों सिंडिकेट कूदे मैदान में

लाखों की अवैध कमाई से गुलजार हुए जिलें के दर्जनों थाने और ओपी

कोई बड़े साहब तो कोई राज्य के आलाकमान का दे रहा हवाला

कमलेश कुमार ‘राजा’

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धनबाद:- बात अगर कोयलांचल धनबाद की हो और अवैध धंधे की चर्चा न हो। तो खबर से ईमानदारी नही होगी। आए दिन विभिन्न मीडिया और अखबारों में आपने कोयले के अवैध धंधों के बारे में सुना और पढ़ा होगा। मन में सवाल कौंधते होंगे की आखिर इन सबके पीछे कौन सी बड़ी ताकते कार्य कर रही है। क्या उन ताकतों को अवैध कोयले का गणित भा गया है। मामला आगे जो भी हो पर लोगों को ये भलीभांति समझ में आ गया है की जिलें भर में इतने वृहद पैमाने पर कोयला तस्करी के कार्य को अंजाम देना, जिले स्तर के बूते में नही है। लागातार मीडिया और अखबारों में प्रमाणिकता के साथ खबर चलने के बाद भी किसी के माथे पर कोई सिकन तक नही, शायद ये उन्ही बड़ी ताकतों के द्वारा प्रदत्त शक्तियों के बल पर बाहुबली बने हुए है तभी सबकुछ चरणबद्ध व्यवस्था के तहत संचालित है। कोई बड़े साहब तो कोई राज्य के आलाकमान से बात होने का हवाला देता है।

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मलाईदार थानों और ओपी की कमाई लाखों में:

सूत्र बताते हैं की कोयला क्षेत्र में आने वाले संबंधित थाने और ओपी अवैध कमाई से गुलजार है। एक एक थाना क्षेत्र में 5 से 7 तस्कर सिंडिकेट कार्य कर रहे है। प्रति सिंडिकेट से थानो को मिलने वाला नजराना लाखों में है। मलाईदार थानों और ओपी को तो बतौर बोली लगाकर जिम्मेनामा सौंपा जाता है। जीटी रोड स्थित थानों की बोली 40 से 70 लाख के दायरे में लगाई जा रही है। जिन्हे कमान चाहिए वे कोरम को पूरा करते है। सिंडिकेट की मदद से मांग की पूर्ति कर उक्त क्षेत्र को सिंडिकेट के हवाले कर दिया जाता है जो बड़े से लेकर छोटे तक सभी का ख्याल रखते है।

व्यवस्था के तहत संचालित होते है अवैध धंधे:

जिलें के एक सेवानिवृत पुलिस अधिकारी ने नाम नहीं प्रकाशित किए जाने की शर्त पर बताया की व्यवस्था के तहत अवैध कार्य को संचालित किया जाता है। सभी को पैसा चाहिए। कोयला प्रक्षेत्र वाले थाने में पदस्थापना की कीमत लाखों में होती है। अब लाखों देकर पदस्थापित होने वाले पदाधिकारी अपने क्षेत्र में संचालित अवैध धंधों(कोयला,लोहा,डीजल,पशु,नशीले पदार्थ) की तस्करी को प्रश्रय नही देंगे तो पैसा कहां से आएगा। इसके अलावा भी उन्हे वरीय अधिकारियों का विशेष ख्याल रखना पड़ता है। जबकि मामला तूल पकड़ने पर गाज गिरने की संभावना भी बनी रहती है।

निरसा,झरिया और बाघमारा क्षेत्र में सिंडिकेट का मंथली टोकन मनी:

जानकारी के अनुसार विभिन्न थाना क्षेत्रों में क्रियान्वित तस्कर सिंडिकेट में सबसे ऊपरी पायदान पर निरसा, बाघमारा और झरिया के सिंडिकेट शामिल है। निरसा के राय और गोप सिंडिकेट द्वारा चिरकुंडा,निरसा को 10 लाख प्रतिमाह। पंचेत,मैथन,गल्फरबाडी को 5 लाख प्रतिमाह। कालूबथान,कुमारधूबी को 2 लाख प्रतिमाह का भुगतान किया जाता है। बाघमारा के रतिलाल,वशिष्ठ,ओझा,यादव,शर्मा,गोयल,रिंकू,पप्पू, निरंजन सिंडिकेट द्वारा बाघमारा,मधुबन,बरोरा, कतरास और महुदा को 10 लाख। तेतुलमारी,जोगता, भाटडीह,सोनारडीह,धमार्बांध,रामकनाली,ईस्ट बसुरिया,कपूरियां को 4 लाख प्रतिमाह दिए जाते है। झरिया क्षेत्र के एस चांदना, जी यादव ग्रुप द्वारा अलकडीहा,झरिया को 8 लाख। धनुडीह,पाथरडीह, सुदामडीह,लोदना,बोर्रागढ़ को 2 लाख रुपए की माहवारी दी जाती है। इसके अलावा धैया के एक दबंग घराने के बाबू को 10 हजार प्रति ट्रक के हिसाब से रंगदारी टोकन मनी का भुगतान किया जाता है।

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