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चीन के नए वायरस की भारत में एंट्री, बढ़ते मरीज देख सरकार चिंतित

ऐसे पहचाने माइकोप्लाज्मा निमोनिया के लक्षण

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दुनियाभर में अभी कोरोना का डर पूरी तरह से लोगों में खत्म भी नही हुआ था कि अब चीन में जन्मे एक और नए वायरस ने भारत में एंट्री कर ली है। इस वायरस का असर सबसे ज्यादा बच्चों में देखने को मिल रहा है। एम्स अस्पताल के मुताबिक भारत में अब तक इस माइक्रोप्लाजमा न्यूमोनिया बैक्टीरिया से पीड़ित सात मरीज सामने आ चुके है। स्वास्थय विभाग की तरफ से इस वायरस का पता लगाने के लिए मॉनिटरिंग बढ़ा दी है। पीसीआर और आईजीएम से मरीजों की पहचान की जा रही है। अब तक जो सात केस भारत में सामने आए है उसमें से 1 केस पीसीआर से जबकि अन्य 6 केस आईडीएम से सामने आए है। स्वास्थ्य विभाग को डर है कि कही चीन की तरह भारत में भी ये वायरस तेजी से पैर ना पसार दें।

 

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केंद्र सरकार ने राज्यों को किया अलर्ट

 

चीन में इन दिनों कोरोना जैसी बिमारी ने घातक रूप ले रखा है। इस रहस्यमयी बिमारी ने भारत सहित अन्य देशों की चिंता बढ़ा दी है। चीन में वायरस का सबसे ज्यादा असर बच्चों में देखने को मिला है। अस्पतालों में संसाधनों पर भारी दवाब पड़ने लगा है। मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। सरकार ने स्कूलों को भी बंद करने की तैयारी कर ली है। इस रहस्यमयी बिमारी को देखकर अब भारत सरकार भी अलर्ट हो चुकी है। सभी राज्यों को अस्पतालों में संसाधन पूरे करने को कहा गया है ताकि देश में मरीजों को उपचार के अभाव में परेशान ना होना पड़े।

 

ऐसे पहचाने माइकोप्लाज्मा निमोनिया के लक्षण

 

चीन में फैल रहे इस नए वायरस की भारत में एंट्री के बाद एक्सपर्ट ने बताया की वायरस के लक्षण से उसकी पहचान की जा सकती है। अगर किसी बच्चे के गले में खराबी, थकान महसूस होना, बुखार, खांसी और सिरदर्द हो रहा है तो इससे ये लगभग तय हो जाता है कि वो माइकोप्लाज्मा निमोनिया की चपेट में आ जाता है। कई बार ये लक्षण बदलते मौसम के कारण भी बच्चों में देखने को मिलते है। इसलिए इसकी पुष्टी के लिए इसका टेस्ट करवाना भी बेहद जरूरी है। हालांकि इस वायरस से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में ट्रांसफर होने का खतरा बेहद कम है और ये वायरस जानलेवा नही है। इसलिए इससे मृत्यु दर भी बेहद कम है।

 

चीन में आतंक मचा रहा माइकोप्लाज्मा निमोनिया वायरस

 

चीन में वायरस ने भारी संख्या में बच्चों को चपेट में ले लिया है। अस्पतालों में मरीजों की लंबी लंबी लाइन लगी है। जिस स्कूलों में किसी भी एक बच्चे में वायरस के लक्षण दिख रहे है। उस पूरे स्कूल को ही बंद कर दिया जा रहा है। मरीजों की बढ़ती संख्या से अस्पताल संसाधनों पर भी इसका दवाब पड़ रहा है। इस वायरस का सबसे ज्यादा खतरा भीड़-भाड़ वाली जगहों पर काम करने से है।

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