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चाईबासा : पशुपालन घोटाला के बाद अब डीएमएफटी घोटाला बना चर्चा का केंद्र बिंदु

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लघु सिंचाई विभाग और विशेष प्रमंडल को 70 करोड़ की दी गई थी योजनाएं ,

डीडीसी कार्यालय से बैंक जाने में चेक को लगे 3 महीने ,समय समाप्त -चेक हुआ बाउंस

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डीएमएफटी बना भ्रष्टाचार का अड्डा मुख्य सचिव से जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग

चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले में पशुपालन घोटाला की तरह चल रहा डीएमएफटी फंड का खेल. बहुचर्चित पशुपालन घोटाला ,लौह अयस्क घोटाला ,योजना घोटाला, प्राक्कलन घोटाला ,,खाद्यान्न घोटाला सहित दर्जनों घोटालों के लिए चर्चित और बदनाम इस जिला में डीएमएफटी घोटाला भी शामिल हो गया है. हाल के दिनों में डीएमएफटी फंड में हो रहे गड़बड़ी, लूट, घोटाले को लेकर जिला चर्चित और बदनाम हो रहा है। बहुचर्चित पशुपालन घोटाले सहित दर्जनों घोटाले के बाद अब इसमे डीएमएफटी फंड का नया कारनामा जुड़ गया है.डीएमएफटी फंड से करीब 100 योजनाओं को पूरा करने के लिए लघु सिंचाई विभाग व विशेष प्रमंडल को दिए गये 35-35 करोड़ के चेक को उपविकास आयुक्त के कार्यालय से एजेंसी तक तथा एजेंसी से बैंक तक पहुंचने में तीन महीने लग गये. जब तक चेक बैंक पहुंचे, तब तक उनकी मियाद खत्म हो चुकी थी. इस कारण बैंक ने चेक को लौटा दिया.इसका नतीजा यह हुआ कि योजनाओं को पूरा करने वाली एजेंसी को राशि नहीं मिली और काम बंद हो गये. जिन ठेकेदारों को काम मिला था, उनकी पूंजी भी फंस गयी है. इधर, एक राजनीतिक दल के जिलाध्यक्ष ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इस मामले की जांच राज्यस्तरीय कमेटी से कराने की मांग की है.
जिले में विकास कार्यों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सांसद व विधायकों की अनुशंसा पर जिला प्रशाशन द्वारा डीएमएफटी फंड से लघु सिंचाई विभाग और ग्रामीण विकास विभाग विशेष प्रमंडल एजेंसी को करीब 100 योजनाएं दी गयी थीं. सांसद व विधायकों की अनुशंसा पर इन योजनाओं को पूरा करने के लिए उपायुक्त ने योजनाओं को स्वीकृति देने के साथ साथ डीएमएफटी फंड से 75 प्रतिशत राशि विमुक्त करने का आदेश भी जारी कर दिया था। इस आदेश के बाद करीब तीन माह पहले उपविकास आयुक्त ने लघु सिंचाई विभाग व विशेष प्रमंडल के नाम 35-35 करोड़ रुपये का चेक एजेंसी के नाम भुगतान के लिए काट दिया था. लेकिन चेक को बैंक तक पहुंचने में तीन महीने कैसे लग गये, इसे लेकर तरह-तरह की चचार्एं हो रही हैं. कई लोग इसके पीछे कमीशन का खेल बता रहे हैं। डीएमएफटी के अंतर्गत स्वीकृत योजनाओं का चेक आउटडेटेड होने की जांच कराने की मांग की है. शिकायत पत्र में कहा गया है कि योजनाओं की स्वीकृति विगत तीन माह पूर्व दी गयी है. इसके आलोक में डीएमएफटी सेल में चेक बनाकर तीन माह तक रखा गया एवं तीसरे महीने के आखिरी दिन इसे एजेंसी को दिया गया. इसका नतीजा यह हुआ कि बैंक ने चेक डिजआॅनर कर दिया. इसके पीछे कमीशनखोरी की मंशा का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा है कि समाहरणालय का डीएमएफटी सेल भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है. उन्होंने मुख्य सचिव से चेक बाउंस होने तथा डीएमएफटी की संचिका निष्पादन में हुए विलंब की जांच राज्यस्तरीय टीम गठित कर कराने की मांग की है ।

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