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चाईबासा: लघु सिंचाई विभाग में लूट, घोटाले, भ्रष्टाचार ,कमीशन खोरी की पराकाष्ठा , लूट घोटाले पर पर्दा डालने के लिए मीडिया मैनेजमेंट!

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 दो कथित मीडिया संगठनो_ गैंग को योजना देकर लूट पर पर्दा डालने और सुनियोजित तरीके से सरकारी राशि की लूट, घोटाले ,कमीशन खोरी बड़े पैमाने पर करने की साजिश
 लघु सिंचाई विभाग लुटेरे अभियंताओं, ठेकेदारों, दलालों , बिचौलियों ,सफेदपोशो का बना अड्डा और चारागाह , अधिकारियों एवं माननीयो की बनी पहली पसंद 
झालको एनआरईपी के बाद सबसे लुटेरा विभाग, भ्रष्टाचार की वह रही है गंगोत्री ,विगत 4_5  वर्षों के सभी योजनाओं की जांच हो तो प्रायोजित तरीके से करोड़ों के घपले घोटालों का होगा पर्दाफाश
 
चाईबासा:  लूट घोटाले भ्रष्टाचार कमीशन खोरी के लिए जिले में चर्चित और बदनाम लघु सिंचाई विभाग का एक और लूट भ्रष्टाचार का कारनामा उजागर हुआ है । लूट घोटाले कमीशन खोरी पर पर्दा डालने के लिए मीडिया मैनेजमेंट किया जा रहा है और कथित मीडिया संगठन, गैंग के लोगों को योजना देकर भारी पैमाने पर  विकास योजनाओं में  और सरकारी राशि में लूट ,घोटाले, भ्रष्टाचार ,कमीशन खोरी का षड्यंत्र रचा जा रहा है। जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की पहली पसंद लघु सिंचाई विभाग और विशेष प्रमंडल वर्तमान में है । पूर्व में झालको और एनआरईपी , जिला परिषद , आरईओ,पथ भवन निर्माण विभाग, जिले में लूट, भ्रष्टाचार कमीशन खोरी के लिए चर्चित और बदनाम था । झालको और एनआरईपी पूर्व में जिला प्रशासन और माननीयो, जनप्रतिनिधियों की पहली पसंद होती थी। केंद्र और राज्य सरकार एवं डीएमएफटी फंड के  करोड़ों अरबों की योजना देकर भारी पैमाने पर घोटाला, लूट ,कमीशन खोरी किया जाता था ।झालको और एनआरईपी के भ्रष्टाचार की गंगोत्री भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा पार होने के बाद लघु सिंचाई विभाग और विशेष प्रमंडल पहली पसंद बन गया है, और यह लुटेरों भ्रष्टाचारियों का चारागाह बन गया है। लूटेरे अभियंताओं और ठेकेदारों सफेदपोषो का अड्डा बन कर रह गया है। विगत 4_5  वर्षों के लघु सिंचाई विभाग और विशेष प्रमंडल को मिले तमाम योजनाओं की जांच होने से प्रायोजित तरीके से अधिकारियों ,जनप्रतिनिधियों , ठेकेदारों ,अभियंताओं ,सफेदपोशो के सांठगांठ से करोड़ों अरबों के लूट घोटाले का पर्दाफाश होगा। निविदा प्रक्रिया से लेकर निविदाओं के चयन और योजनाओं की गुणवत्ता आदि खुद लूट भ्रष्टाचार कमीशन खोरी की मिसाल है। लघु सिंचाई विभाग और विशेष प्रमंडल में लूट भ्रष्टाचार की गंगा, गंगोत्री बह रही है। दोनों हाथों से लुटेरे ,भ्रष्टाचारी अभियंता ,ठेकेदार सफेदपोश सरकार की विकास योजनाओं एवं सरकारी राशि को लूटने में लगे हैं। विगत वर्षों में जितनी भी योजनाएं ली गई अधिकांश योजनाओं में गुणवत्ता नहीं के बराबर है। भारी पैमाने पर तमाम योजनाओं में लूट और घोटाला किया गया है । लघु सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार विद्यार्थी के घूस लेते ठेकेदार से 20 हजार रुपया रंगे हाथ एसीबी द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद भी लघु सिंचाई विभाग में लूट घोटाला ,भ्रष्टाचार कमीशन खोरी रुकने का नाम नहीं ले रहा है और यह दिनों दिन बढ़ते जा रहा है। लघु सिंचाई विभाग अपने कारनामों के लिए चर्चित ही नहीं जिला में कुख्यात है। सेवानिर्वित कार्यपालक अभियंता जयप्रकाश सिंह के कार्यकाल में भी लघु सिंचाई विभाग जिले में खूब चर्चा में रही ।करोड़ों के विकास योजनाओं सड़क, पुल पुलिया का  नियम विरूद्ध ऑफलाइन निविदा निकाला गया और अपने चहेते ठेकेदारों को देकर सरकारी राशि की लूट मचाई गई। लघु सिंचाई विभाग में सरकारी राशि के लूट घोटाले, कमीशन खोरी और विकास योजनाओं में घोटाले पर पर्दा डालने के लिए मीडिया मैनेजमेंट किया जा रहा है । चाईबासा और मजगांव विधानसभा में कथित मीडिया कर्मियों को योजना देकर लूट पर पर्दा डाला जा रहा है। पिछले दिनों भी डीएमएफटी फड से कुछ योजनाएं कथित मीडिया संगठनों गैंगो के बीच वितरण किया गया और कथित ठेकेदार मीडिया समूह को पुरस्कृत किया गया। ताकि घोटालों पर पर्दा डाला जा सके और निरंतर घोटाले घपले घोटाले और सरकारी राशि में लूट मचाई जा सके। अधिकारी से लेकर अभियंता माननीय तक की कमीशन खोरी निरंतर बड़े पैमाने पर होती रहे ।
 विगत 2_3 वर्षों में जिला में नई संस्कृति माल दो और काम लो, अधिकारी ,ठेकेदार ,अभियंता माननीयों की बल्ले-बल्ले**
जिले में विगत  2_3सी वर्षो में जिले में ठेकेदारी की प्रथा सिस्टम भी चेंज हो गई है। पहले ठेकेदारों के बीच टेंडर निकलने पर काम लेने के लिए प्रतिस्पर्धा होती थी। और 5 से 10 और  15 से 20 प्रतिशत  तक लोग प्राक्कलन राशि से भी बिलों कम रेट  डालकर टेंडर भरते थे और जिसका कम रेट होता था उसे काम मिलता था ।लेकिन अब ठेकेदारों की दौड माननीय तक हो गई है और माननीयो द्वारा ही जिले में निकलने वाली तमाम विभागों की योजनाओं को तय किया जाता है, कि कौन ठेकेदार कौन योजना करेगा, कहां कहां करेगा। इसके लिए जो पहले प्रतिस्पर्धा में 5 से 10 और 15 से 20 प्रतिशत तक रेट कम हो जाता था। और सरकार का पैसा बचता था।  वह अब नहीं होता है । शेड्यूल रेट पर   तय  ठेकेदारों  टेंडर द्वारा डाला जाता है । जिसमे 5 से 7 तक माननीयो  की कमीशन होती है। वही सीएस ,टीएस और विभागीय स्तर पर 30 से 35 प्रतिशत कुल 40 से  45  प्रतिशत कमीशन खोरी लूट की भेंट चढ़ जाता है।  वही योजनाओं के उद्घाटन शिलान्यास में भी मोटा माल का खेल होता है। अधिकारियों माननीयों के साथ घाट से जिले में अब जो नई ठेकेदारी प्रथा, सिस्टम चली है उससे ठेकेदारों को भी आराम है कि प्रतिस्पर्धा में अधिक नुकसान नहीं होता है, 5 से 10 प्रतिशत राशि जो पहले प्रतिस्पर्धा कंपटीशन के कारण चली जाती थी, और काम को लेकर भी संशय की स्थिति उत्पन्न होती थी ।अब माल ढीला करो और काम ले लो।  घटिया काम करने पर जांच लिखा पढ़ी और कार्रवाई का भी मामला सलट जाता है। ठेकेदार, अभियंता, माननीयो और अधिकारियों की इस नई व्यवस्था में बल्ले बल्ले हैं। पूर्व में डीएमएफटी फड से लघु सिंचाई विभाग को 35 करोड़  और विशेष प्रमंडल को 35  कुल 70 करोड़ पीसीसी सड़क की योजना दी गई थी वह नए जिले में लागू नए सिस्टम के अनुसार हुआ था। जिसमें भारी पैमाने पर कमीशन खोरी लूट घोटाला हुआ है। बीते दो-तीन वर्षों में  करोड़ों अरबों की दोनों विभागों को योजना दी गई है, सभी योजनाओं में गुणवत्ता में काफी गड़बड़ी और अनियमितता है। कोई योजना प्राक्कलन और मानक के अनुसार नहीं हुआ है। ठेकेदार _ अभियंता, माननीय गठजोड़ ने जिले में लूट घोटाले की सभी पराकाष्ठा पार कर दी है।

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