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चाईबासा : डीएमएफटी फंड को लेकर अधिकारी- कार्यकारी एजेंसी का एक दूसरे पर गंभीर और संगीन आरोप 

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 बैंक ने लौटाया चेक,दोषी कौन- डीएमएफटी सेल ,जिम्मेवार अधिकारी या कार्यकारी एजेंसी ?       
 
 डीएमएफटी करोड़ों अरबों की राशि चढ़ रहा है लूट ,भ्रष्टाचार और कमीशन खोरी की  
 
 कार्यकारी एजेंसी के अभियंता अधिकारी पर  अधिकारी कार्यकारी एजेंसी के अभियंता पर, वही संवेदक- ठेकेदार कार्यकारी एजेंसी और अधिकारियों पर  लगा रहे है कमीशनखोरी का आरोप
 
 डीएमएफटी फंड की विगत 5 वर्षों में हुए योजनाओं की उच्च स्तरीय जांच की मांग ,करोड़ों -अरबों के घोटालों का होगा पर्दाफाश ,भ्रष्टाचारी- लुटेरों , सफेदपोशों का चेहरा होगा बेनकाब
     
चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले में डीएमएफटी फंड से करीब 100 योजनाओं के लिए बना करीब 70 करोड़ का चेक तीन महीने विलम्ब से बैंक पहुंचने के कारण बैंक ने चेक को वापस लौटा दिया । जिसके बाद जिला प्रशासन ने कार्यकारी एजेंसियों को जबकि कार्यकारी एजेंसियां जिला प्रशासन को कोसते नजर आ रहे हैं । प्रशासनिक महल से आ रही सुगबुगाहट को सच मानें तो मात्र 15 फीसदी कमीशन के चक्कर मे डीएमएफटी फंड का 75 फीसदी स्वीकृत राशि का करीब 70 करोड़ का चेक उपविकास आयुक्त कार्यालय  के द्वारा लेट से कार्यकारी एजेंसी को भेजने के कारण बैंक ने चेक को लौटा दिया है । पश्चिमी सिंहभूम जिले में सिंहभूम सांसद व विधायको के अनुशंसा पर जिला प्रशासन द्वारा डीएमएफटी फंड से करीब 100 योजनाओ के लिए लघु सिंचाई प्रमंडल व ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल को कार्यकारी एजेंसी बनाया गया था । इन योजनाओं को ससमय धरती पर उतारने के लिए उपायुक्त के द्वारा योजनाओं की स्वीकृति देने के साथ ही साथ डीएमएफटी फंड से 75 फीसदी राशि विमुक्त करने का आदेश भी जारी कर दिया गया । तीन माह पहले ही उक्त दोनों कार्यकारी एजेंसियों के नाम से 35-35 करोड़ का चेक तो काट दिया गया । मगर उप विकास आयुक्त के टेबुल में ही तीन माह धूल फेंकने के बाद आखिर उक्त दोनों चेक बैंक तक का सफर पूरा तो किया । लेकिन बैंक ने उसे वापस लौटा दिया । जिसके बाद चर्चा-ए-आम है कि कार्यकारी एजेंसियों से 15 फीसदी सीएस कमीशन लेने के लिए चेक को विलम्ब से कार्यकारी एजेंसियों को दी गई । जिसके कारण करीब 100 योजनाओं पर ग्रहण-सा लग गया है । डीएमएफटी फंड में घालमेल कमीशन खोरी और चेक बाउंस होने का मामला सामने आने के बाद उप विकास आयुक्त संदीप बख्शी ने मीडिया को कहा कि उसने कार्यकारी एजेंसियों को चेक दे दिया था ।
जिसके बाद कार्यकारी एजेंसियों का दायित्व बनता है कि वे समय पर पीआईएल एकाउंट में जमा कर ट्रेजरी से निकाल अभिकर्ताओं को भुगतान करें । लेकिन कार्यकारी एजेंसियों ने ऐसा नहीं किया जिसके कारण चेक को बैंक ने लौटा दिया  इसके लिए जिम्मेदार कार्यकारी एजेंसी है ।  लघु सिंचाई प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता 31 दिसम्बर को सेवा निवृत्त होने वाले थे इसलिए उन्हें चेक नही दी । अब यह पूरा मामला उलझता जा रहा है और कार्यकारी एजेंसी के अभियंता अधिकारी पर आरोप लगा रहे हैं और अधिकारी कार्यकारी एजेंसी के अभियंता पर, वही संवेदक- ठेकेदार कार्यकारी एजेंसी और अधिकारियों पर कमीशनखोरी का आरोप लगाते हैं यह पूरा मामला जिले में चर्चा का विषय बन गया है।जिसकी उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच जरूरी है कि गलती किसकी है जिला प्रशासन का या फिर कार्यकारी एजेंसी का । हालांकि डीएमएफटी में पूर्व में योजनाओं में भारी लूट गड़बड़ी और कमीशन खोरी को लेकर चर्चित और बदनाम होता रहा है, पूर्व के अधिकारियों के समय लूट की खुली छूट अभियंताओं ठेकेदारों सफेद पौधों को मिलती रही थी और संरक्षण भी राजनीतिक दलों का मिलता रहा था जिसके कारण भारी पैमाने पर लूट कमीशन खोरी ह
हुई थी झाल को और एनआरईपी डीबीएमएस फंड में लूट भ्रष्टाचार का जीता जागता मिसाल है जिसके कारण ही झाल को और एनआरईपी को इस बार योजना नहीं दी गई और लघु सिंचाई विभाग विशेष प्रमंडल को योजना दी गई जिसको पूर्व में ही लूट में महारत हासिल थी। यहीं से विवाद शुरू हो गया झालको और एनआरईपी में पूर्व का चर्चित लुटेरा ठेकेदार बिचौलिया सफेदपोश भ्रष्ट अधिकारियों का कॉकस – सिंडीकेट  डीएमएफटी फंड को लूट रहा था। हाल के दिनों  में इसमें कमी आई थी जिसके कारण लूटेरे अभियंताओं और  ठेकेदारों  में नियम विरुद्ध और खुलम खुला लूट की छूट नहीं देने वाले अधिकारी आंखों की किरकिरी बन गए थे। लूट और कमीशनख़ोरी को लेकर जिला बदनाम हो रहा है।डीएमएफटी फंड को लेकर जिला पूर्व से ही विवादित रहा हैं । डीएमएफटी के करोड़ों अरबों का फंड लूट ,भ्रष्टाचार और कमीशन खोरी की भेंट तक चढ़ता जा रहा है। डीएमएफटी  फंड की राशि नियम कानून को ताक पर रखकर और फर्जी ग्राम सभा, बिना ग्राम सभा के योजनाओं, अनुपयोगी योजनाओं को लेकर खर्च की जा रही है। डीएमएफटी फंड पर सबसे पहला हक खदान प्रभावित क्षेत्रों एवं वहां के लोगों का है लेकिन हाल के दिनों में डीएमएफटी  की राशि को बेतरतीब ढंग से नियम कानून को ताक पर रखकर अधिकारियों द्वारा किया जा रहा हैं। डीएमएफटी  फंड की राशि से पीसीसी सड़क, आंगनवाड़ी केंद्र सहित जायज -नाजायज , अनुपयोगी योजनाओं पर खर्च की जा रही है। जिसकी उच्चस्तरीय जांच जरूरी है। जिला में विगत 5 वर्षों में डीएमएफटी की राशि और उनसे होने वाली योजनाओं की उच्चस्तरीय जांच से डीएमएफटी फंड में हुई भारी पैमाने पर लूट ,भ्रष्टाचार ,घोटाले और कमीशन खोरी की खेल का पर्दाफाश होगा और इसमें शामिल अधिकारियों, भ्रष्ट लुटेरे -अभियंताओं ठेकेदारों ,सफेदपोशों का चेहरा भी बेनकाब होगा।

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