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कोल्हान में कोरोना गाइडलाइन के तहत मना ईद-उल-अजहा का त्योहार

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मुस्लिम समुदाय ने अदा की बकरीद की नमाज, खुशहाली के लिए मांगी सामुहिक दुआ
जमशेदपुर/चाईबासा/सरायकेला। ईद उल अजहा मुस्लिम समुदाय का पाक त्यौहार है। इसे लेकर बुधवार को कोल्हान प्रमंडल के तीनों जिलों पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम एवं सरायकेला-खरसावां में ईद-उल-अजहा का त्योहार कोरोना गाइडलाइन के तहत मनाया गया। तीनों जिलेभर में सादगी के बीच कुबार्नी के त्यौहार ईद उल अजहा की नमाज अदा की गई। कोरोना के कारण मस्जिदों व ईदगाह में सन्नाटा पसरा रहा। मुस्लमानों ने घरों की चाहरदीवारी के अंदर ही कैद होकर अकीदत के साथ ईद उल अजहा की नमाज अदा की। इस बकरीद पर कोराना वायरस संक्रमण महामारी को लेकर लोगों में साफ खौफ देखने को मिला। लोगों ने घरों में नमाज अदा की एवं एक-दूसरे को बधाइयां दी। खुदा से मुसलमानों ने अमन-चैन व खुशहाली के साथ शांति व मगफिरत की सामुहिक दुआ की। इमाम से खुतबे सुनने के बाद लोगों ने एक दुसरे को बकरीद की मुबारकबाद दी। नमाज अदा करने के बाद कुर्बानियों का दौर शुरू हो गया। ईद उल अजहा से तीन दिनो तक कुबार्नी की रस्म अदा की जाती है। कोल्हान प्रमंडल के तीनों जिलों से हमारे प्रतिनिधि के अनुसार से शहर से लेकर गांव तक कोविड गाइडलाइन के तहत बकरीद पर्व मनाया गया। मुस्लिम धर्मावलंबियों द्वारा अपने अपने घरों में शारीरिक दूरी बनाते हुए नमाज अदा कर परिवार के साथ ईद मनाने की सूचना हर क्षेत्र से हैं। एक-दूसरे को गले लग कर ईद की बधाई दे रहे हैं। साथ ही कोरोना से मुक्ति की कामना अल्लाह ताला से कर रहे हैं। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बताया कि बकरीद कुबार्नी का बहुत बड़ा पर्व है। हमें अल्लाह ताला के चरणों में अपने प्रिय से प्रिय वस्तु को न्योछावर करने की सीख देता है। सबसे पहले कब्रिस्तान में जाकर हम लोग पूर्वजों की आत्मा की शांति की कामना करते हैं। जिसके बाद बकरीद की नमाज अदा की जाती है। मुसलमान केवल जानवरों की ही नही बल्कि बुरी आदतो की भी कुबार्नी दे। कुबार्नी लोगो में त्याग की भावना जगाती है। खास जानवरों को सवाब की नीयत से अल्लाह की राह में जबहा करे। कुबार्नी हजरत इब्राहीम अलैहिस सलाम की सुन्नत है। मोहम्मद साहब ने भी कुबार्नी का हुक्म दिया है। कुरआन पाक के सूरह कौसर में अल्लाह फरमाता है तुम अपने रब के लिए नमाज पढों और कुरबानी करो। कोरोना को देखते हुए और सरकार के दिशा-निदेर्शों का पालन करते हुए हम सब अपने अपने घरों में ही बकरीद की नमाज अदा कर रहे हैं। ईद उल अजहा को बकरीद भी कहा जाता है। आज के दिन मुस्लिम धर्मावलंबी बकरे की बलि देकर उसका तीन हिस्सा करते हैं। एक गरीब के लिए, दूसरा आने वाले मेहमान के लिए और तीसरा हिस्सा अपने लिए। बकरे की कुबार्नी वही मुस्लिम धर्मावलंबी दे सकता है जिसके पास साढ़े सात तोला सोना या साढे 52 तोला चांदी या उसके बराबर का रुपया है। मंगलवार को लोगों ने अरफा का रोजा रखा था। पश्चिमी सिंहभूम के जैंतगढ़ जामा मस्जिद के पूर्व इमाम मौलाना नाजिर हुसैन ने बताया कि नबी मोहम्मद स. ने जब पहला अरफा का रोजा रखा तो उस दिन जुमा का दिन था। उन्होंने इस दिन की फजीलतों को बताते हुए कहा कि आज ही के दिन दीन ए इस्लाम मुकम्मल हुआ था इसलिए अरफा के दिन को साल का सबसे बेहतरीन दिन कहा जाता है। अरफा के दिन रोजा रखने से एक साल के अगले और एक साल के पिछले सारे सगीरा गुनाह माफ हो जाते हैं।

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