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बकरीद पर ढील: सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार को फटकार लगायी, कहा- अगर संक्रमण फैला तो कार्रवाई होगी

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नई दिल्ली :केरल में एक बार फिर कोरोना संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में केरल सरकार की ओर से बकरीद पर लॉकडाउन में ढील दिए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई। सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा, ‘यह अफसोस की बात है कि राज्य सरकार व्यापारी संगठनों के दबाव में आ गई। उन इलाकों में भी दुकान खोलने की अनुमति दी जहां कोरोना दर 15 फीसदी से अधिक है और लोगों की जान को खतरे में डाल दिया।’
सुप्रीम कोर्ट ने बकरीद के मद्देनजर लॉकडाउन में ढील देने पर केरल सरकार को जमकर लताड़ लगाई। कहा कि यह चौंकाने वाली स्थिति है। राज्य सरकार ने ट्रेडर्स समूह के दबाव में बाजार खोल दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केरल सरकार का हलफनामा चिंताजनक। यह भारत के सभी नागरिकों को जीवन के अधिकार की गारंटी नहीं देता है। केरल सरकार ने बकरीद के अवसर पर इस तरह की छूट देकर देश के नागरिकों के लिए राष्ट्रव्यापी महामारी के जोखिम को बढ़ा दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘हम केरल सरकार को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निहित जीवन के अधिकार पर ध्यान देने का निर्देश देते हैं।’  साथ ही कहा कि अगर अगर बकरीद के लिए राज्य द्वारा दी गई ढील से कोविड-19 का और प्रसार होता है, तो वह कार्रवाई करेगा।
हालांकि, बकरीद पर लॉकडाउन ढील पर केरल सरकार द्वारा अधिसूचना को रद्द करने पर सुप्रीम कोर्ट का कोई आदेश नहीं दिया। लॉकडाउन में ढील का आज आखिरी दिन है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने कहा कि कुछ आदेश पारित किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा अब कोई मतलब नहीं है। वहीं कांवड़ यात्रा पर उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले के संबंध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले से लिए गए स्वत: संज्ञान मामले में दिल्ली निवासी पीकेडी नांबियार ने हस्तक्षेप आवेदन दायर किया है। इसमें कहा गया है कि कोरोना काल में यात्रा पर शीर्ष अदालत द्वारा जताए गए असंतोष के बावजूद, केरल सरकार कोविड-19 के मानदंडों में ढील देकर लापरवाही बरत रही है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह शीर्ष अदालत में पेश होंगे। नांबियार ने तर्क दिया कि केरल में कोविड मामलों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। ऐसे में त्योहार के लिए मंजूरी देना खतरनाक हो सकता है।
याचिका में कहा गया है, ‘यह चौंकाने वाला है कि एक चिकित्सा आपात स्थिति में राज्य सरकार इस तरह के उपायों के माध्यम से नागरिकों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रही है। सरकार का यह कदम इस अदालत द्वारा पारित 16 जुलाई के आदेश का पूरी तरह से उल्लंघन है।’ 16 जुलाई को शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार से कोरोना की संभावित तीसरी लहर के मद्देनजर कांवड़ यात्रा पर अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए कहा था।

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