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वल्लभनगर में कांग्रेस एवं धरियावद में भाजपा का रहा वर्चस्व

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जयपुर : राजस्थान में तीस अक्टूबर को होने वाले उदयपुर जिले के वल्लभनगर एवं प्रतापगढ़ जिले के धरियावद विधानसभा उपचुनाव की इन दोनों सीटों पर अब तक वल्लभनगर में कांग्रेस एवं धरियावद में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दबदबा रहा है। वल्लभनगर में वर्ष 1952 से अब तक हुए पन्द्रह विधानसभा चुनावों में सर्वाधिक सात बार कांग्रेस ने जीत दर्ज कर इस क्षेत्र में अपना वर्चस्व कायम किया जबकि भाजपा ने यहां केवल दो बार बाजी मारी। इस क्षेत्र में सबसे अधिक पांच बार कांग्रेस प्रत्याशी के रुप में गुलाब सिंह शक्तावत ने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया जबकि उनके पुत्र गजेन्द्र सिंह शेखावत दो बार पार्टी के टिकट पर इस क्षेत्र से विधायक चुने गये। क्षेत्र में वर्ष 1957 में कांग्रेस के दो प्रत्याशियों गुलाब सिंह शक्तावत एवं हरिप्रसाद ने जीत दर्ज की थी। इस चुनाव के बाद श्री शक्तावत वर्ष 1972, 1985, 1993 एवं 1998 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर विधायक चुने गये। वह इस क्षेत्र से छह बार विधायक चुने गए जिसमें वर्ष 1967 में एक बार स्वतंत्र पार्टी के उम्मीदवार के रुप में भी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। गजेन्द्र सिंह शक्तावत ने वर्ष 2008 एवं 2018 में इस क्षेत्र में विधानसभा चुनाव जीतकर प्रतिनिधित्व किया। भाजपा ने यहां केवल दो बार जीत हासिल की जिसमें वर्ष 1980 में कमलेन्द्र सिंह भाजपा उम्मीदवार के रुप में विधायक चुने गये जबकि वर्ष 2003 में रणधीर सिंह भींडर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंचे। इससे पहले श्री कमलेंद्र सिंह ने वर्ष 1977 में जनता पार्टी के उम्मीदवार के रुप क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके थे और उन्होंने वर्ष 1990 का चुनाव भी जीता लेकिन इस बार उन्होंने जनता दल उम्मीदवार के रुप में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। भाजपा के विधायक रह चुके श्री भींडर ने वर्ष 2013 का चुनाव भी जीता लेकिन निर्दलीय विधायक बनकर दूसरी बार विधानसभा पहुंचे। इनके अलावा वर्ष 1952 में क्षेत्र के पहले विधानसभा चुनाव में जनसंघ के आर एस दलीप विजयी रहे जबकि वर्ष 1962 में स्वतंत्र पार्टी के अमृत लाल यादव ने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 2008 में अस्तित्व में आई धरियावद विधानसभा क्षेत्र में अब तक तीन विधानसभा चुनाव हुए जिसमें सबसे अधिक दो बार भाजपा ने जीत दर्ज कर अपना दबदबा कायम किया हैं जबकि कांग्रेस ने यहां केवल एक बार बाजी मारी हैं। इस क्षेत्र में वर्ष 2008 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नगराज मीणा ने जीत दर्ज की जबकि इसके बाद हुए वर्ष 2013 एवं 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार गौतम लाल मीणा विजयी रहे थे। श्री गौतम लाल मीणा का गत 19 मई को निधन होने से धरियावद सीट खाली हो गई जबकि इससे पहले गत 20 जनवरी को श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के निधन होने से वल्लभनगर सीट खाली हो गई थी। वल्लभनगर उपचुनाव के लिए सत्तारुढ़ कांग्रेस ने पूर्व विधायक गजेन्द्र सिंह शक्तावत की पत्नी प्रीति शक्तावत को टिकट देकर सहानुभूति कार्ड का दांव खेला हैं जबकि भाजपा ने यहां हिम्मत सिंह झाला को चुनाव मैदान में उतारकर नया दावं खेला है। हालांकि इस उपचुनाव के लिए पूर्व विधायक रणधीर सिंह भींडर एवं उनकी पत्नी ने निर्दलीय के रुप में नामांकन कर रखा हैं। इसी तरह गत विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के रुप में चुनाव लड़े उदय लाल डांगी ने टिकट नहीं मिलने पर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (रालोपा) का दामन थाम लिया और रालोपा उम्मीदवार के रुप में अपना नामांकन किया है। इसी तरह धरियावद से कांग्रेस ने पूर्व विधायक नगराज मीणा को फिर मौका दिया हैं जबकि भाजपा ने प्रतापगढ़ जिले में अनुसूचित जनजाति मोर्चा के अध्यक्ष खेत सिंह मीणा को चुनाव मैदान में उतारकर नया दांव खेला है लेकिन पूर्व विधायक गौतम लाल मीणा के पुत्र कन्हैया लाल मीणा को टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने बगावत करके अपना पर्चा भर दिया हैं। हालांकि नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख तेरह अक्टूबर है और भाजपा अपने बागी उम्मीदवार को मनाने की कोशिश कर रही है। इन दोनों सीट के लिए 29 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ने के लिए नामांकन किया हैं जिनमें वल्लभनगर में 16 एवं धरियावद में 13 शामिल हैं। अब नाम वापस लेने के बाद ही चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की तस्वीर साफ हो पायेगी। उल्लेखनीय है कि गत सत्रह अप्रैल को हुए तीन विधानसभा सीटों के उपचुनाव में कांग्रेस ने दो सीटों जबकि भाजपा ने एक सीट पर बाजी मारी थी। पिछले चुनाव में कांग्रेस को सहाड़ा एवं सुजानगढ़ विधानासभा क्षेत्र में पूर्व विधायक के परिवार को टिकट देने पर सहानुभूति का फायदा मिला जबकि भाजपा को राजसमंद में इसका फायदा मिला। इस बार कांग्रेस ने वल्लभनगर से पूर्व विधायक के परिवार से टिकट दिया गया जबकि भाजपा ने सहानुभूति कार्ड का दांव नहीं खेला।

 

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