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भारत ने गाजा में युद्ध विराम के प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र में नहीं किया मतदान

जॉर्डन के प्रस्ताव में हमास के आतंकी हमले का नहीं था जिक्र

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भारत ने इजरायल और हमास के बीच चल रहे युद्ध विराम को लेकर संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश किए गए एक प्रस्ताव पर वोटिंग मतदान से खुद को अलग रखा है. ये प्रस्ताव जॉर्डन की ओर से लाया गया था परन्तु इसमें हमास और उसकी आतंकी गतिविधियों का जिक्र नहीं था. इसलिए भारत ने मतदान का बहिष्कार किया.

 

भारत सहित 45 देशों ने मतदान का किया बहिष्कार

 

जॉर्डन द्वारा लाए गए प्रस्ताव में गाजा में मानवीय संघर्ष विराम का आह्वान किया गया था. परन्तु पूरे प्रस्ताव में हमास की आतंकी गतिविधियों की कोई चर्चा नहीं की गई थी. इसलिए भारत ने मतदान से खुद को दूर रखा. भारत के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जर्मनी, यूके और जापान ने भी मतदान में हिस्सा नहीं लिया.जॉर्डन के प्रस्ताव को रूस, दक्षिण अफ्रीका, बांग्लादेश, पाकिस्तान सहित चालीस से अधिक देशों ने सह प्रायोजित किया था. “नागरिकों की सुरक्षा और कानूनी व मानवीय दायित्वों को कायम रखना” शीर्षक वाला प्रस्ताव पेश किया गया, जिसमें 120 देशों ने इसके पक्ष में मतदान किया, 14 ने इसके खिलाफ और 45 देशों ने मतदान नहीं किया.

 

भारत ने किया आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस अपनाने का आह्वान

 

भारत ने हमास द्वारा बंधक बनाए गए इजरायल के लोगों के लिए संवेदना व्यक्त की है और तत्काल उनकी रिहाई की मांग की है. संयुक्त राष्ट्र में भारत की उप स्थायी प्रतिनिधि योजना पटेल ने कहा कि 7 अक्टूबर को इजरायल में किए गए आतंकी हमले चौंकाने वाले और निंदा के लायक थे. उन्होने कहा, कि संयुक्त राष्ट्र जैसी प्रतिष्ठित संस्था कोहिंसा पर गहराई से चिंतित होना चाहिए. उन्होने कहा कि आतंकवाद एक घातक रोग है और इसकी कोई सीमा, राष्ट्रीयता या नस्ल नहीं होती. योजना पटेल ने दुनिया के देशों से आपसी मतभेदों को दूर रखकर आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस अपनाने की भी अपील भी की.

 

 कनाडा संशोधन का प्रस्ताव को नहीं मिल पाया जरूरी बहुमत

गाजा में मानवीय युद्धविराम के लिए संयुक्त राष्ट्र में पेश किए गए जॉर्डन के प्रस्ताव में एक संशोधन के लिए कहा गया है. कनाडा द्वारा प्रस्ताव में एक पैराग्राफ डालने के लिए कहा गया है. इसमें पैराग्राफ में कहा जाएगा कि, ‘7 अक्टूबर 2023 को इज़राइल में शुरू हुए हमास के आतंकवादी हमलों को स्पष्ट रूप से खारिज करती है और निंदा करती है और बंधकों को छोड़ने, सुरक्षा की मांग करती है. ’

भारत सहित 87 अन्य देशों ने कनाडा द्वारा पेश किए गए संशोधन के पक्ष में मतदान किया. 55 सदस्य देशों ने इसके खिलाफ मतदान किया वहीं 23 देश अनुपस्थित रहे. दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल पाने के कारण मसौदा संशोधन को अपनाया नहीं जा सका.

 

 

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