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मिर्ची बाबा को अखिलेश यादव ने दी बधाई ,कमलनाथ और शिवराज को लगी मिर्ची !

कांग्रेसी रहे मिर्ची बाबा जेल भी जा चुके हैं 

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दिल्ली डेस्क

मध्यप्रदेश की राजनीतिक गलियारों में मिर्ची बाबा की खूब चर्चा हो रही है। कई तरह की उनकी तस्वीर वायरल हो रही है। एक तस्वीर सपा मुखिया अखिलेश यादव के साथ भी सामने आ रही है। अखिलेश यादव ने मिर्ची बाबा को बधाई दी है। यह बधाई की कहानी कई नेताओं की नींद को हराम कर रही है। एक तरफ कमलनाथ परेशान है तो दूसरी तरफ शिवराज सिंह चौहान भी परेशान हैं। परेशानी की वजह यह है कि कई लोगों ने यह कहना शुरू कर दिया है कि मिर्ची बाबा सपा की टिकट से चुनाव लड़ने वाले हैं और वे किसी बड़े नेता के खिलाफ मैदान में खड़े होंगे। मिर्ची बाबा चुनाव लड़ेंगे या नहीं यह कोई नहीं जानता लेकिन कमलनाथ और सीएम शिवराज सिंह ने अपने लोगों को मिर्ची बाबा के पीछे लगा दिया हैं।

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     मिर्ची बाबा का असली नाम मुकेश दुबे है। वे भिंड के रहने वाले हैं। उनके पिता अयोध्या में एक मंदिर के पुजारी रहे हैं। मिर्ची बाबा बहुत पहले एक तेल कंपनी में काम करते थे। बाद में जमीन बेचकर ट्रक ख़रीदे। ट्रक का व्यापार भी नहीं चला। फिर गुजरात चले गए। गुजरात में एक मिल में काम करने लगे। वही पर उनकी सांगत एक संत महात्मा से हो गई और वे सन्यास ले लिए। फिर नन्द गिरी बन गए। फिर मध्यप्रदेश के गावों में उनकी ख्याति बढ़ने लगी। लोगो उनसे आशीर्वाद लेने आने लगे। उनके प्रवचन भी होने लगे। बाबा की खासियत यह हो गई कि जो भी व्यक्ति  उनसे मिलने आते थे उसे वे मिर्ची की धूनी देते थे। इसी से उनका नाम मिर्ची बाबा हो गया। बाबा व्यासपीठ पर बैठकर फिर भागवत की कथा कहने लगे।
       बाबा के सम्बन्ध में कई नेता भी आये। कांग्रेस के लोग भी उनसे आशीर्वाद लेने लगे। कांग्रेस के भीतर उनकी चलने लगी। वे दिग्विजय सिंह के संपर्क में आ गए। 2019 में जब मिर्ची बाबा भोपाल से चुनाव लड़ रहे थे तब मिर्ची बाबा ने कहा था कि अगर दिग्विजय सिंह चुनाव हारते हैं तो वे जल समाधी ले लेंगे। दिग्विजय सिंह हार गए लेकिन बाबा का जल समाधी नहीं हुआ। यह भी बता दें कि जब 2018 में कमलनाथ की सरकार बनी तो मिर्ची बाबा को निगम का अध्यक्ष  बनाकर राज्य मंत्री का दर्जा भी दिया गया। जैसे ही कमलनाथ की सरकार गई ,मिर्ची बाबा के बुरे दिन शुरू हो गए। 2022 में बाबा पर एक महिला ने रेप का केस दर्ज कर दिया और बाबा को साल भर तक जेल में भी रहना पड़ा। फिर उनकी कांग्रेस सरकार से बिगड़ गई।

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     अब बाबा अखिलेश यादव से मिले हैं। कई लोग कह रहे हैं कि बुधनी से चुनाव लड़ सकते है। कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि बाबा छिंदवाड़ा से चुनाव लड़ेंगे। लेकिन अभी तक बाबा कुछ बोल नहीं रहे हैं। अखिलेश यादव भी मौन है। सियासत गर्म है।
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