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संवेदक बदले, सरकार बदली, नहीं बदली लोहरदगा-रिचुघुटा पथ की तस्वीर

करोड़ों की सड़क आमजन के लिए बनी मौत का डगर
हुसैन अंसारी
किस्को/लोहरदगा: सड़कें विकास का आइना होती हैं। लोहरदगा में विकास की यह तस्वीर बेहद धुंधली है। जर्जर सड़कें विकास में बाधक बनीं हुई हैं। इससे न सिर्फ, स्वास्थ्य, शिक्षा, बल्कि रोजगार भी प्रभावित हो रही हैं। इसका सबसे बड़े उदाहरण जिले के बहुचर्चित किस्को मोड़ लोहरदगा से रिचुघुटा भाया किस्को मुख्य पथ 31.5 किमी लंबी सड़क निर्माण कार्य वर्षों से अधर पर लटकी हुई है। अब तो यह सड़क नागरिकों के लिए मौत का डगर भी बन गया है। वर्षों से चुनावी मुद्दा रहे यह पथ नेताओं के वजह से आज भी अधनिर्मित है। बात करें झारखंड में सत्ता परिवर्तन की तो पूर्व के रघुवर सरकार के कार्यकाल में सड़क निर्माण कार्य का शुभारंभ किया गया था, लेकिन सरकार बदल गई, संवेदक भी बदले, पर अब तक लोहरदगा से लातेहार को जोड़ने वाली इस पथ की तस्वीर नहीं बदली। सड़क की दुर्दशा ऐसी हो गई है कि आए दिन छोटे-बड़ी दुर्घटनाएं हो रही है। सड़क पर लंबे समय से दर्जनों जगह पर बाक्स पुलिया निर्माण कार्य के लिए बड़े-बड़े गड्ढे खोदकर यूं ही मौत को दावत दिया जा चुका है। सड़क की स्थिति इतनी भयावह है कि कभी भी किसी की जान जा सकती है। इधर सड़क निर्माण कार्य को लेकर कितने बार जनता की आवाज बने लोहरदगा विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक कमल किशोर भगत द्वारा निर्माण कार्य कराए जाने को लेकर स्थल निरीक्षण भी कर अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं, बावजूद सड़क निर्माण कार्य करा रही पांडे कंस्ट्रक्शन एवं प्रधान कंस्ट्रक्शन कंपनी की ओर से कछुए की चाल में सड़क निर्माण कार्य कराए जाने से लोगों में आक्रोश स्पष्ट दिखाई दे रहा है। मालूम हो कि 78 करोड़ रुपए की लागत से सड़क निर्माण कार्य कराई जा रही है। लोग भय के साथ प्रखंड व जिला मुख्यालय आवागमन करते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं सड़क पर चलने वाली बाक्साइट ट्रक के आवागमन पर उड़ने वाली धुल भी कई तरह के गंभीर बीमारियों को परोस रही है। फिर भी सड़क निर्माण कार्य करा रहे कंपनी को जनता की स्वास्थ्य के प्रति कोई दिलचस्पी भी नहीं है। हमारे लोकसभा सांसद सुदर्शन भगत, राज्यसभा सांसद धीरज प्रसाद साहू, सांसद समीर उरांव और स्थानीय विधायक सह झारखंड सरकार के मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव को भी जनता के दुख दर्द से कोई सरोकार शायद नहीं है। कई नागरिकों ने इसकी जानकारी लिखित और मौखिक रूप से शिकायत कर चुके हैं।

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