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शिक्षा विकास के बिना झारखंड में वैज्ञानिक दृष्टिकोण लाना संभव नहीं: प्रो.नितिशा खलखो

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साइंस फिल्म फेस्टिवल के दूसरे दिन फिल्म मेकर प्रबल महतो ने डॉक्यूमेंट्री एवं ड्रामा फिल्म निर्माण की बारीकियां बतायी 
कयूम खान 
लोहरदगा: साइंस फिल्म फेस्टिवल 2022 के दूसरे दिन डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ऑडोटोरियम में अनेक फ़िल्म का प्रदर्शन किया गया। फ़िल्म प्रदर्शनी को देखकर लोग खुश हुए और इस कार्यक्रम की प्रशंसा किये। इस अवसर पर फ़िल्म प्रदर्शन के साथ-साथ एक प्रशिक्षण कार्यशाला का भी आयोजन किया गया। जिसमें डॉक्यूमेंट्री एवं ड्रामा फिल्म मेकर प्रबल महतो के द्वारा डॉक्यूमेंट्री फिल्म एवं शॉर्ट्स फिक्शन निर्माण की बारीकियों की जानकारी दी गई। निर्माता-निर्देशक प्रबल महतो ने अपने 30 वर्षों के फिल्म निर्माण के अनुभव के आधार पर कार्यशाला में उपस्थित प्रशिक्षु छात्रों को फिल्म निर्माण के संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की एवं उन्हें फिल्म निर्माण से संबंधित बेसिक जानकारियां उपलब्ध कराया। मैथन कॉलेज मैथन झारखंड की असिस्टेंट प्रोफेसर नितिशा खलखो के द्वारा झारखंड समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण के विकास में शिक्षा की भूमिका पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्चा में नीतिशा खलखो ने कहा की झारखंड में शिक्षा के विकास के बिना लोगों के बीच वैज्ञानिक दृष्टिकोण लाना संभव नहीं है। जब यहां के बच्चे शिक्षित होंगे तो निश्चित रूप से समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास होगा।
 प्रमुख फिल्म निर्माता निर्देशक श्रीराम डाल्टन ने झारखंड में जल स्रोतों को बचाने के जल अभियान में फिल्मों की भूमिका पर अपनी बात रखी। निरंजन कुमार कुजूर द्वारा निर्मित एवं निर्देशित फिल्म पहाड़ा की नायिका श्रीमती सुमित्रा टोप्पो जो  लोहरदगा में ही जन्मी पली-बढ़ी और शिक्षा पाई है इन्होंने अपनी पहली फिल्म से जुड़ी अपनी यादों को साझा किया।
फ़िल्म फेस्टिवल के आयोजन कमिटी के समन्वयक अरुण राम ने बतलाया कि फेस्टिवल का आयोजन लोहरदगा के लिये चुनौतियों भरा था उस चुनौती को हमने स्वीकार किया परिणाम स्वरूप अच्छी और शिक्षाप्रद फिल्में लोहरदगा वासियों को देखने को मिल रही है। हम सभी इस अवसर का लाभ लेकर समाज में जाकर वैज्ञानिक सोच को साकार करें। सचिव राहुल कुमार ने कहा कि इस प्रकार की प्रशिक्षण कार्यशाला एवं ज्वलंत मुद्दों पर परिचर्चा का आयोजन का उद्देश्य वैज्ञानिक जागरूकता के संदेश को आम लोगों तक पहुंचाना है। डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम ऑडिटोरियम में विभिन्न फिल्मों का प्रदर्शन किया गया पहले सत्र में निर्देशक आदित्य की क्रो किंग फ्रॉग, डम्प द जुंक, द गनीता स्टोरी, रामानुजम, दिलेर अरूणिमा सिन्हा, गाड़ी लोहरदगा मेल, आई एम नॉट ए बिच, एंट ए टाइनी क्रिएचर, मरकरी इन द मिस्ट, द लास्ट बहुरूपिया, चलती का नाम उष्मा आदि फिल्में दिखाई गई। दूसरे सत्र में माय एक्सपीरियंस विद साइंस, पहाड़ा, दिवी दुर्गा, सांझी सोच रेड डाटा बुक, सोंध्यानी, दामोदर सौरो, बुरूगारा, आदि फिल्में दिखाई गई। ऑडिटोरियम में दर्शक काफी संख्या में उपस्थित थे और  फिल्मों का भरपूर आनंद लिए। विभिन्न फिल्मकारों ने अपनी फिल्म के संबंध में दर्शकों के साथ चर्चा विमर्श किया। आयोजन को सफल बनाने में सोसायटी के अध्यक्ष डॉ गणेश प्रसाद, संजय बर्मन, सचिव राहुल कुमार, समन्वयक अरुण राम, जगतपाल केसरी, धर्मेंद्र प्रसाद सोनी, आलोक कुमार, जितेंद्र मित्तल, सुदामा साहू, विजय दास, मनीष कुमार, स्नेह कुमार, प्रवीण कुमार, बीके बालाजिनप्पा, विकास कुमार, डी एन एस आनंद, अली इमाम खान, अमरजीत सिंह ने मुख्य भूमिका निभायी।
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