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शारधा घोटाला : पूर्व पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार की गिरफ्तारी की मांग, सुप्रीम कोर्ट पहुंची सीबीआई

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नयी दिल्ली : शारधा चिटफंड घोटाला मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने सुप्रीम कोर्ट से कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार की गिरफ्तारी और हिरासत में लेकर पूछताछ की मांग की है। सीबीआई का कहना है कि राजीव कुमार जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। कोलकाता हाइकोर्ट ने पिछले साल 1 अक्टूबर को उन्हें जमानत दी थी। हाइकोर्ट से राजीव कुमार को अग्रिम जमानत मिलने के 14 महीने बाद सीबीआई ने अर्जी दाखिल कर जमानत रद्द करने और कस्टडी में पूछताछ की इजाजत मांगी है। शनिवार शाम को सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में सीबीआई ने कहा, हाइकोर्ट ने जमानत देते हुए यह साफ किया था कि राजीव कुमार जांच में सहयोग करेंगे। वह जांच के संबंध में सबूतों के गायब होने के बारे में जानते हैं इसलिए उनकी गिरफ्तारी और कस्टडी में लेकर पूछताछ जरूरी है। कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर रहे राजीव कुमार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी माने जाते हैं। साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने अन्य चिटफंड मामलों के साथ शारधा घोटाला मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी। इससे पहले पश्चिम बंगाल सरकार ने घोटाले की जांच के लिए जिस एसआईटी का गठन किया था, राजीव कुमार उसके अहम सदस्य थे। पिछले साल 1 अक्टूबर को जब हाइकोर्ट ने राजीव कुमार को जमानत दी थी, जब सीबीआई ने तुरंत सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इसके बाद 29 नवंबर को राजीव कुमार को एक नोटिस जारी किया गया था, लेकिन उसके बाद से मामला लंबित था। सीबीआई का कहना है कि वह शारधा के डायरेक्टर्स सुदीप्त सेन, देबजानी मुखर्जी और कई शीर्ष टीएमसी राजनेताओं की इस बड़ी साजिश को सुलझाना और जांच को अंजाम तक पहुंचाना चाहती है। सीबीआई का कहना है कि राजीव कुमार ने शीर्ष टीएमसी नेताओं और शारधा चिट फंड्स के डायरेक्टर्स को बचाने के लिए कॉल डेटा रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ कर सबूतों को मिटाने का काम किया है। शारधा कंपनी ने पश्चिम बंगाल में कई पोंजी स्कीम्स चलायी थीं, जिसमें कथित तौर पर लाखों लोगों के साथ फ्रॉड किया गया। साल 2013 में जब भंडाफोड़ हुआ तो लोगों के हजारों-करोड़ों रुपये डूब गये। उसी साल प्रोमोटर सुदीप्त सेन को गिरफ्तार कर लिया गया।

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