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सनसनी नहीं, सटीक खबर

मौत के बाद भी चैन नहीं लेने दे रहे हैं कोरोना के गिद्ध

प्रतीक सिंह
रांची: ‘नहीं, नहीं इतने कम पैसे में नहीं हो सकता, हमारे एरिया के सीओ ने कोई भी गाइडलाइन नहीं दिया है। कम से कम 20000 लगेंगे, नहीं तो आप अपना लाश वापस ले जाइए। ‘ इस तरह की बातें रांची के कमोबेश सभी शमशान घाटों पर सुनने को मिल रही हैं। अस्पतालों से घाट तक पहुंचते-पहुंचते मृतक के परिजनों की जेबें ढीली हो जाती हैं। पहले अस्पताल का खर्चा, और यदि किसी की मृत्यु हो जाती है तो उसके शरीर को प्लास्टिक बैग में बंद करने से लेकर उसे एंबुलेंस तक पहुंचाने में हर कदम पर परिजनों को पैसे देने पड़ रहे हैं। उसके बाद घाट पर एक नई कहानी ही उन्हें सुनने को मिलती है। हालात इतने बुरे हैं कि हर कोई गिद्ध की तरह नोचने पर तुला हुआ है।

परिजन लाचार और बेबस स्थिति में मजबूरन उन्हें पैसे दे देते हैं। हालांकि कुछ लोग इसका विरोध भी करते हैं लेकिन तत्काल समय में उनका विरोध भी काम में नहीं आता। झारखंड में भी कोरोना हर दिन नए रिकॉर्ड बना रहा है। जहां एक ओर मुख्यमंत्री हर रोज आॅक्सीजन सपोर्टेड बेड समेत कोरोना पीड़ितों की सुविधाओं को लेकर प्रयास कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अधिकारियों की टोली मुख्यमंत्री के प्रयासों में पलीता लगाने में लगी है। रांची के तीन बड़े शमशानों हरमू,घाघरा और जुमार में ये शमशान भी शुमार है।

सरकार सरकार के साथ हाई कोर्ट ने भी बार बार कहा है कि कोरोना से हर रोज हो रही मौतों के बाद राज्य के अधिकारी कम से कम शांति से शवों के अंतिम संस्कार की ब्यवस्था सुनिश्चित करें,लेकिन अधिकारियों ने सब कुछ दलालों और कोरोना के गिद्धों पर छोड़ दिया है। जुमार नदी पर एक शव का अंतिम संस्कार करने के लिए ये गिद्ध 20 हजार तक की मांग कर रहे हैं। कोरोना की त्रासदी में अपनों को गंवा चुके पीड़ितों के परिजन गुहार लगा रहे हैं, लेकिन ये गिद्ध मानने को राजी नहीं। इन गिद्धों का  कहना है कि सीओ साहब के निर्देश पर 20 हजार की मांग की जा रही है। ये हालत  ब्यवस्था में लगे लोगों की पोल खोलता है।
अधिकारी कर रहे निर्देशित

घाटों पर काम करने वाले लोगों ने बताया कि जिस तरह से अधिकारी उन्हें निर्देशित कर रहे हैं , वे लोग उसी तरीके से काम कर रहे हैं। कुछ लोग उनकी मांगों को पूरा भी कर रहे हैं तो कुछ उन से लड़ाई कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सर्कल आॅफिसर ने उन्हें यहां लाश जलाने का जिम्मा दिया है लेकिन पैसे को लेकर कोई दिशा निर्देश जारी नहीं किया है। कोरोना महामारी की इस दूसरी लहर के दौरान अस्पतालों में जहां बेड, आॅक्सीजन, पर्याप्त मात्रा में दवाई उपलब्ध नहीं है, वहीं दाह संस्कार घाट पर भी कुछ इसी तरीके का माहौल नजर आ रहा है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर सरकार ऐसे स्थिति पर लगाम क्यों नहीं लगा रही है।
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ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जरूरत: कांग्रेस
कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा कि विपदा की इस घड़ी में इस तरह की खबरें झकझोर देने वाली हैं। अगर इसमें सत्यता है तो ऐसे लोगों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होगी। सरकार ने अपनी जनता के लिए हर तरह की सुविधाओं की घोषणा की है। खुद मुख्यमंत्री इसकी लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। ऐसे में इस तरह की खबरों का आना बिल्कुल संज्ञान लेने लायक है और अगर इस खबर में सत्यता हुई, तो इसका असर भी दिखेगा।

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