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भीषण चिलचिलाती गर्मी से राहत देने में ‘देशी फ्रीज’ बन रहा लोगों की पहली पसंद

रकुंडा/एग्यारकुंड: वैश्विक महामारी कोरोना के दूसरे लहर से निपटने के लिए केंद्र व राज्य सरकार के द्वारा युद्ध स्तर पर प्रयास जारी है। बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए देश के कई राज्यों में लॉकडाउन जारी है। एक ओर कोरोना वायरस ने लोगों के जीवनशैली को प्रभावित कर रखा है दूसरी ओर प्रचंड गर्मी व तेज धूप ने लोगों को रुला कर रख दिया है वही इन सब के बीच देशी फ्रीज के रूप में प्रचलित मिट्टी के घड़े ने लोगों को बड़ी राहत देने का कार्य किया है। गुरुवार को गरीब व मध्यमवर्गीय तबके के लोगों ने मिट्टी के घड़े की खरीदारी करते हुए कहा कि मिट्टी निर्मित देशी फ्रीज में रखा पानी कई मायनों में स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है जिसे समय-समय पर वैज्ञानिकों व चिकित्सको ने तथ्यों के आधार पर कई बार इसकी पृष्टि की है।

महामारी के इस दौर में किसी तरह 20 घड़ों की बिक्री कर चलाते है परिवार

मैथन मेन रोड व कुमारधुबी बाजार स्थित देशी फ्रीज के रूप में मिट्टी के घड़े बेच रहे गरीब दुकानदार विपिन कुमार व राजेश ने बताया कि आत्मनिर्भर भारत बनाने की दिशा में स्वदेशी निर्मित वस्तुओं का उपयोग व निर्माण देशहित के लिए अहम सिद्ध होगा। इसमें देश के लाखों-करोड़ों गरीब व मध्यमवर्गीय परिवारों को रोजगार सृजन करने में बहुपयोगी साबित होगा। उन्होंने कहा कि लंबे समय से चल रहे कोरोनाकाल व लगाए जा रहे लॉक डाउन में गरीब व मध्यमवर्गीय तबका अत्यधिक परेशान है। प्रतिदिन 20 घड़े बेचकर परिवार की जीविका बड़ी मुश्किल से चला पाते हैं।

जल के प्राकृतिक रूप को बनाये रखने में कारगर है घड़े

कुमारधुबी बाजार में मिट्टी के घड़े व सुराही बेच रही महिला दुकानदार सुमन देवी ने बताया कि भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए शुद्ध व शीतल पेयजल हेतु लोग घड़े को ले जाते है जो प्राकृतिक रूप से जल को अपने शुद्ध रूप में रखने के लिए विख्यात है। अभी के इस मौसम में लोग इलेक्ट्रॉनिक फ्रीज की ओर ज्यादा भागते हैं। पूर्व में इसके कारण घड़े की बिक्री में भारी कमी आई थी लेकिन अभी रमजान के पावन माह में लोग घड़े खरीदने ज्यादा संख्या में आ रहे है। अभी एक मिट्टी के बड़े घड़े की कीमत 100 से 150 रुपये रखी है, जो दूसरे संसाधन की तुलना में काफी कम है। वैश्विक महामारी कोरोनाकाल व लॉकडाउन में इसी रोजगार ने परिवार के लिए दो वक्त की रोटी जुटाने में पूरी मदद की

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