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सनसनी नहीं, सटीक खबर

पद्मश्री डॉ मानस बिहारी वर्मा का निधन

दरभंगा: बिहार में दरभंगा जिले के घनश्यामपुर प्रखंड के बाउर गांव से निकल कर देश ही नहीं दुनिया में अपना नाम रौशन करने वाले वैज्ञानिक मानस बिहारी वर्मा का कल देर रात यहां लहेरियासराय स्थित निवास पर निधन हो गया। श्री मानस बिहारी वर्मा कुछ दिनों से अस्वस्थ थे। कल देर रात हार्ट अटैक होने से उनकी मौत हो गयी। उनके निधन की खबर के बाद जिले में शोक की लहर है। डॉक्टर मानस बिहारी वर्मा का जन्म दरभंगा जिले के घनश्यामपुर प्रखंड के बाउर गाँव में 29 जुलाई 1943 को हुआ। उनके पिता का नाम किशोर लाल दास था। तीन भाई और चार बहनों का उनका परिवार है। उनकी स्कूली शिक्षा मधेपुर के जवाहर हाई स्कुल से पूरी हुई थी, मैट्रिक की परीक्षा उतीर्ण करने बाद उन्होंने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान पटना और कोलकाता विश्वविद्यालय में अध्ययन किया था। डॉक्टर मानस बिहारी वर्मा ने 35 वर्षों तक अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) में एक वैज्ञानिक के रूप में काम किया। उन्होंने बैंगलोर, नई दिल्ली और कोरापुट में स्थापित विभिन्न वैज्ञानिकी विभागों में भी काम किया। डॉ मानस बिहारी वर्मा पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के अभिन्न मित्र रहे। 1986 में तेजस फाइटर जेट विमान बनाने के लिए टीम बनी थी, उस समय लगभग 700 इंजीनियर इस टीम में शामिल किए गए थे। डॉक्टर वर्मा ने इस टीम में बतौर मैनेजमेंट प्रोग्राम डायरेक्टर के रूप में अपना योगदान दिया था।तेजस विमान की डिज़ाइन बनाने की पूरी जिम्मेदारी उन्होंने संभाली थी साथ ही वे लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट डिज़ाइन टीम के भी सदस्य रह चुके थे।डॉ वर्मा की प्रेरणा से मिसाइल मैन अब्दुल कलाम साहब ने कई बार दरभंगा जिले का दौरा किया। जब भी वे बिहार आते थे मानस बिहारी वर्मा जरूर मिलते थे। पूर्व राष्ट्रपति कलाम की तरह ही मानस बिहारी वर्मा ने देश सेवा के जूनून में शादी नहीं की । मानस बिहारी वर्मा (डीआरडीओ) से जुलाई, 2005 में सेवानिवृत्त होने के बाद बेंगलुरु में पांच सितारा जीवन को त्यागकर अपने गांव दरभंगा के बाऊर पहुंचे। यहाँ रहते हुए उन्होंने गांव के बच्चों को शिक्षा देना शुरू कर दिया। विशेष कर सरकारी विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों के बीच जाकर ये उनमें वैज्ञानिक चेतना जगाते थे । इसके लिए इन्होंने विकसित भारत फाउंडेशन की स्थापना भी की।विकास भारत फाउंडेशन के माध्यम से दरभंगा, मधुबनी, सुपौल ,सीतामढ़ी आदि जिलों के बच्चों को विज्ञान और कंप्यूटर ज्ञान प्रदान करने में शामिल हुए। विज्ञान और कंप्यूटर प्रशिक्षकों की एक टीम वैज्ञानिक प्रयोगों का प्रदर्शन करने और कंप्यूटर सिखलाने के लिए मानस बिहारी वर्मा के नेतृत्व में स्कूलों का दौरा करती थी। यह शिक्षण आईबीएम द्वारा समर्थित ‘लैब इन बॉक्स’ (एलआईबी) कार्यक्रम के माध्यम से किया जाता था।इसके अलावा ये डॉ प्रभात दास फाउण्डेशन के माध्यम से भी समाज सेवा का अलख अंतिम क्षण तक जगाते रहे । वह दरभंगा प्रवास में कई सामाजिक एवं शैक्षणिक संगठनों से जुड़े रहे। वह ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के महिला प्रौद्योगिकी संस्थान के डायरेक्टर भी रहे थे। पद्मश्री सम्मान से सम्मानित वैज्ञानिक डॉ मानस बिहारी वर्मा आजीवन राष्ट्र और समाज की सेवा में सलंग्न रहे ।मानस बिहारी वर्मा को कई सम्मान से भी सम्मानित किया गया था। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने डॉ. मानस बिहारी वर्मा को साइंटिस्ट आॅफ द ईयर पुरस्कार से सम्मानित किया था। वह मनमोहन ंिसह के द्वारा ‘टेक्नोलॉजी लीडरशिप अवार्ड’ से भी नवाजे गए थे।वर्ष 2018 में उन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा पद्म श्री सम्मान से भी सम्मानित किया गया था। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय ने वर्ष 2019 के दीक्षांत समारोह में डॉक्टर वर्मा को डिलीट की की मानद उपाधि से सम्मानित किया था। हाल-फिलहाल में वे रामचरित मानस की चौपाई में वर्णित प्रकृति के तत्व पर कार्य कर रहे थे। जो उनके असमय निधन से अधूरा ही रह गया । इस बीच दरभंगा के सांसद गोपाल जी ठाकुर, विधायक संजय सरावगी, बिहार सरकार के पूर्व मंत्री डॉक्टर मदन मोहन झा ,ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एसके ंिसह समेत कई लोगों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। उनका दाह संस्कार उनके पैतृक गांव बिरौल अनुमंडल के घनश्यामपुर प्रखंड के बाउर गांव में आज शाम होगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से उन्हें जिला प्रशासन भावभीनी श्रद्धांजलि देगा। राजकीय सम्मान के साथ दाह संस्कार की तैयारी की जा रही है।

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