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निजी अस्पताल में गरीब मरीज के इलाज का खर्च सरकार उठायेगी: योगी

लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकारी अस्पताल में बेड उपलब्ध नहीं होने की दशा में सम्बन्धित अस्पताल मरीज को निजी चिकित्सालय में सन्दर्भित करेगा। प्राइवेट हॉस्पिटल में मरीज यदि भुगतान में सक्षम नहीं होगा, तो ऐसी दशा में राज्य सरकार आयुष्मान भारत योजना के तहत अनुमन्य दर पर वहां उसके इलाज का भुगतान करेगी। श्री योगी ने रविवार शाम मंडलायुक्त और जिलों के आला अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक में कहा कि लखनऊ, प्रयागराज और वाराणसी में रिकवरी की दर में वृद्धि एक सुखद संकेत है और महामारी के खिलाफ हर स्तर पर सभी के सहयोग और समन्वय के साथ पूरी मजबूती और दृढ़ता के साथ संघर्ष करना होगा, तभी इसके सुपरिणाम निकलेंगे और सफलता मिलेगी। उन्होंने कहा कि सभी मण्डलायुक्त अपनी कमिशनरी के जिलों में कोविड बेड की संख्या में वृद्धि, आॅक्सीजन सहित जीवन रक्षक दवाओं की अनवरत उपलब्धता की समीक्षा करते हुए उपचार की प्रभावी व्यवस्था बनाए रखें। प्रत्येक जिले में रात्रिकालीन कोरोना कर्फ्यू रात्रि आठ बजे से सुबह सात बजे तक लागू होगा।मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी सरकारी अथवा निजी अस्पताल बेड उपलब्ध होने पर कोविड पॉजिटिव मरीज को भर्ती के लिए मना न करे। यदि सरकारी अस्पताल में बेड उपलब्ध नहीं है, तो सम्बन्धित अस्पताल उसे निजी चिकित्सालय में सन्दर्भित करेगा। प्राइवेट हॉस्पिटल में मरीज भुगतान के आधार पर उपचार कराने में यदि सक्षम नहीं होगा, तो ऐसी दशा में राज्य सरकार आयुष्मान भारत योजना के तहत अनुमन्य दर पर वहां उसके इलाज का भुगतान करेगी। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में उपचार के अभाव में किसी भी मरीज का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए। उन्होने कहा कि अधिकारियों को पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य करते हुए कोविड प्रबन्धन व संक्रमित मरीजों के उपचार की व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी होंगी। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों, जनपद के प्रभारी मंत्रियों तथा इण्डियन मेडिकल एसोसिएशन से संवाद बनाते हुए व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ करने के भी कार्य किए जाएं। होम आइसोलेशन तथा अस्पताल में भर्ती मरीजों के साथ किसी भी प्रकार संवादहीनता न हो। होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों को मेडिकल किट उपलब्ध करायी जाए, जिसमें कम से कम सात दिन की दवाएं उपलब्ध हों। मुख्यमंत्री ने आगरा, प्रयागराज, कानपुर, गोरखपुर, वाराणसी, लखनऊ, मेरठ, सहारनपुर, अलीगढ़, मुरादाबाद, बरेली, आजमगढ़, अयोध्या, झांसी आदि मण्डलायुक्तों से संवाद कर उनके मण्डलों में कोरोना प्रबन्धन, बचाव व उपचार के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि फील्ड में तैनात यह अधिकारी शासन एवं जिले के बीच एक अत्यन्त महत्वपूर्ण कड़ी हैं। इसलिए कोविड पर प्रभावी नियंत्रण करने में इनके दायित्व अत्यन्त चुनौतीपूर्ण हैं। श्री योगी ने कहा कि राज्य सरकार ने युद्धस्तर पर प्रयास करके आॅक्सीजन आपूर्ति को सुचारु बनाए रखा है। आॅक्सीजन की कोई कमी नहीं है। इसकी उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। लेकिन इसके दुरुपयोग को हर हाल में रोकना होगा। यह सुनिश्चित किया जाए कि आॅक्सीजन का वेस्टेज किसी भी प्रकार से न हो। उन्होंने निर्देशित किया कि सभी मण्डलायुक्त अपने मण्डल के सभी जिलों में आॅक्सीजन आपूर्ति की नियमित समीक्षा करें। उन्होने कहा कि प्रत्येक 100 बेड के अस्पताल में आॅक्सीजन प्लाण्ट स्थापित करने की कार्यवाही की जाए। इनके अलावा, जिलों में आॅक्सीजन प्लाण्ट स्थापित करने की सम्भावनाओं के प्रस्ताव मुख्य सचिव को प्रेषित किए जाएं। जिनकी प्रति मुख्यमंत्री कार्यालय को भी भेजी जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक अस्पताल में फायर सेफ्टी सम्बन्धी सभी तैयारियां व कार्यवाही सुनिश्चित की जाएं।

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