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जय श्रीराम का उद्घोष कर घर पर रहकर श्रद्धालु मना रहे हैं रामनवमी

पटना: बिहार में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव श्रद्धालु घर पर रहकर आस्था के साथ मना रहे हैं।ंिहदू धर्म के अनुसार रामनवमी लोगों के लिए महत्वपूर्ण त्योहार है। इस दिन भगवान हनुमान का दर्शन करके लोग प्रसाद चढ़ाते हैं। रामनवमी के दिन भगवान श्रीराम की पूजा-अर्चना करने से विशेष पुण्य मिलता है। धर्मशास्त्रों के अनुसार, रामनवमी के ही दिन त्रेता युग में महाराज दशरथ के घर विष्णु जी के अवतार भगवान श्री राम का जन्म हुआ था। इस दिन उपवास और ब्राह्मणों को भोजन कराना भी बहुत फलदायक है। कहते हैं ऐसा करने से घर में धन-समृद्धि आती है। बिहार मे कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए इस बार रामनवमी समेत अन्य धार्मिक आयोजन पर रोक लगा दी गई है। रामनवमी के अवसर पर राजधानी पटना समेत राज्य के अन्य हिस्सों में श्रद्धालु ओम रामाय नम: का मंत्र जाप एवं हनुमान चालीसा का पाठ अपने घर में रहकर कर रहे हैं। श्रद्धालुओं ने भगवान को लड्डू, माला चढ़ाकर अपने साथ पूरे परिवार के कल्याण की कामना की। रामनवमी को लेकर पूरा शहर हनुमान जी की ध्वजों एवं पताकाओं से पट जाता था लेकिन यह लगातार दूसरी बार है जब पूरे शहर में कोरोना वायरस के कारण सन्नाटा पसरा हुआ है। रामनवमी के अवसर पर पटना में कई भव्­य शोभायात्राएं निकाली जाती थी, जो इस बार रद्द कर दी गयी है। पटना जंक्शन स्थित प्रसिद्ध महावीर मंदिर सहित तमाम मंदिरों में पुजारी ही मंदिर की ध्वजा को बदलकर परंपरागत तरीके से पूजा-अर्चना कर रहे हैं। आम लोगों के लिये मंदिरों में प्रवेश पर रोक लगा दी गयी है। महावीर मंदिर सिर्फ पटना ही नहीं, देश के प्रमुख मदिरों में एक है। मदिर का इतिहास करीब तीन सौ साल पुराना है। वर्ष 1713 से 1730 के बीच स्वामी बालानंद के नेतृत्व में इस मदिर की नींव पड़ी। वर्ष 1983 में महावीर मंदिर पटना के जीर्णोद्धार का शिलान्यास किया गया। इसके बाद वर्ष 1985 में मंदिर नए स्वरूप में बन कर तैयार हो गया।महावीर मंदिर प्रबंधन की ओर से कहा गया है कि रामनवमी के दिन महावीर हनुमान, भगवान राम और सभी देवी-देवताओं को नए वस्त्र धारण कराए जाएंगे। इस मौके पर महावीर मंदिर में तीनों स्थानों पर लगे ध्वज बदले जाएंगे। कोरोना को लेकर महावीर मंदिर ने विशेष उपाय किए हैं। मंदिर न्यास समिति के सचिव आचार्य किशोर कुणाल ने कोरोना के बढ़ते संक्रमण को ध्यान में रखते हुए भक्तों से मन्दिर नहीं आने की अपील की है। उन्होंने बताया कि रामनवमी के दिन महावीर मंदिर में भक्तों की सुख-शान्ति और कोरोना संकट से मुक्ति के लिए विशेष पूजा होगी। भक्तों के लिए जियो टीवी के माध्यम से आॅनलाइन दर्शन की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि भक्त महावीर मंदिर की वेबसाइट पर पूजन, आरती एवं कीर्तन के सीधे प्रसारण का आनंद उठा सकते हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव रामनवमी पर्व के अवसर पर प्रदेश एवं देशवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी है। उन्होंने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि रामनवमी जैसे पर्व राष्ट्रीय एकता, अखण्डता तथा देश की सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करते हैं। उन्होंने राज्यवासियों से आ’’ान किया कि पावन पर्व रामनवमी को प्रेम और भाईचारे के साथ हर्षोल्लास के साथ मनायें।वर्तमान में कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुये प्रत्येक व्यक्ति का सचेत रहना नितांत आवश्यक है। सभी लोग मास्क का प्रयोग करें, आपस में दूरी बनाकर रहें। अनावश्यक रूप से घर से बाहर नहीं निकलें। आपके सहयोग से ही इस महामारी से निपटने में सफलता मिलेगी। ज्योतिष विज्ञान परिषद के सदस्य कर्मकांड विशेषज्ञ ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा ने बताया कि प्रभु श्रीराम का अवतरण चैत्र मास की शुक्ल पक्ष को नवमी तिथि में कर्क लग्न से युक्त मध्याह्न काल की पावन बेला में हुआ था। आज दोपहर के समय रवियोग तथा अश्लेषा नक्षत्र का युग्म संयोग के साथ कर्क लग्न, कर्क राशि के साथ सूर्य की उत्तम स्थिति में पूजा- पाठ, भक्ति, आराधना, सतसंग एवं मनोकामना पूर्ति के लिए भगवान राम का जन्मोत्सव मनाने से सुख, वैभव, सुखमय वैवाहिक जीवन, कीर्ति, यश, मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि एवं संतान की प्राप्ति होगी। आज रामनवमी पर अश्लेषा नक्षत्र तथा ंिसह राशि में उपस्थित चन्द्र में प्रभु श्रीराम का जन्मोत्सव मनाया जायेगा। उन्होंने बताया कि आज श्रद्धालु व्रत-उपवास कर विधि-विधान से अपने घरों में प्रभु श्रीराम की पूजा कर जन्मोत्सव मनाएंगे। पूजा के बाद विप्रजन को मिष्ठान तथा जरूरतमंद लोगो को दान देने से सुख-समृद्धि, यश तथा वैभव की प्राप्ति होती है।कोरोना काल में फैलते संक्रमण को देखते हुए जहां मंदिर व धार्मिक स्थल बंद है क इसीलिए अपने घरों में ही सीमित संसाधनों में ही भगवान राम की पूजा-अर्चना करना सर्व हित्तकर रहेगा।आचार्य राकेश झा ने कहा कि भगवान तो भाव के भूखे होते है, घर में ही यथा संभव व्रतोत्सव करे। रामचरितमानस या रामायण के बालकाण्ड का पाठ, भजन, स्तुति आदि कर मर्यादा पुरुषोत्तम की महिमा को अपने बच्चों को बताये तथा उनके अनुसरण पर चलने का प्रण ही सच्ची पूजा होगी।

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