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सनसनी नहीं, सटीक खबर

चाहे जान चली जाए पर दुकानदारी बंद न होने पाए

गढ़वा में उड़ाई जा रही है लॉक डाउन की धज्जियां, नहीं हो रहा है सोशल डिस्टेंसिंग का पालन

कई प्रतिष्ठित दुकानों में चल रहा है लुकाछिपी का खेल, शटर बंद कर अंदर से कर रहे दुकानदारी

फोटो : रंका मोड़ पर सोशल डिस्टेंसिंग को ठेंगा दिखाते लोग

संजीव शर्मा
गढ़वा : चाहे जान चली जाए पर दुकानदारी बंद ना होने पाए। जी हां बिल्कुल ऐसा ही हो रहा है गढ़वा में। गढ़वा के कतिपय व्यवसायी अपनी जान हथेली पर रखकर दूसरों की भी जान जोखिम में डाल रहे हैं। शहर के कई नामी-गिरामी और प्रतिष्ठित व्यवसायी कोरोना काल में काफी गंदे व घिनौने खेल खेल रहे हैं। सरकार के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए लॉक डाउन की धज्जियां उड़ा रहे हैं। बाहर से दुकान का शटर बंद कर अंदर ग्राहकों को ले जा कर कर दुकानदारी करने में मशगूल हैं।

स्थिति ऐसी हो रही है कि चारों तरफ से बंद दुकान में लोगों की भीड़ अधिक हो जा रही है। दुकान से बाहर हवा निकलने का भी जगह नहीं है। ऐसी स्थिति में कोरोना का संक्रमण किस हद तक पहुंचेगा यह सोचने वाली बात है। शहर के अधिकतम दुकानों के बाहर सुबह से शाम तक दुकान का स्टाफ बैठा रहता है। जैसे ही लोग गुजरते हैं या दुकान के समीप कोई ग्राहक पहुंचता है वे झट से रोककर पिछले दरवाजे से अथवा मौका देख कर शटर रहा उठाकर दुकान के अंदर घुसा लेते हैं। कई दुकानदार तो दुकान के आसपस के घरों में दुकान का सामान शिफ्ट कर दिए हैं, और बड़े ही आराम से ग्राहकों को घर में बुलाकर दुकानदारी कर रहे हैं। साथ ही कई अन्य गढ़वा वासी भी कम नहीं हैं। बाजार निकले तो सोशल डिस्टेंसिंग भूल जा रहे हैं। कुछ लोग बेवजह सड़क पर टहलने भी निकल रहे हैं। कोरोना के कहर के बीच कतिपय व्यवसायी व अन्य लोग लोग निडरता एवं बेशर्मी की हदों को पार करते हुए मरना पसंद कर रहे हैं परंतु पूरी तरह से दुकान बंद कर खुद को, अपने घर परिवार को व समाज को सुरक्षित रखना पसंद नहीं कर रहे हैं।

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