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सनसनी नहीं, सटीक खबर

केंद्रीय मंत्री, सांसद, पूर्व मंत्री समेत TMC से आए दलबदलूओ का सूपड़ा साफ। सुवेन्दु विपक्षी दल के नेता बन सकते हैं

सिर्फ मुकुल राय, सुवेन्दु अधिकारी जीते, मुकुल के लड़के शुभ्रंशु राय भी हारे

बीजेपी ने बहुत जोर लगाया परन्तु काम नहीं आया, मुख्यमंत्री की कुर्सी तो नहीं मिली विपक्ष का नेता पद जरूर मिला, अब देखना है कि सुवेन्दु विपक्षी दल के नेता बनते हैं कि मुकुल राय, ने ममता बनर्जी को हराया है इसलिए उनका दावा मजबूत है
रविवार का दिन भाजपा के लिए काफी बुरा साबित हुआ और बंगाल में सत्ता में आने का सपना धरा का धरा रह गया। पार्टी के बड़े – बड़े दिग्गज और दलबदलू ममता बनर्जी के सामने धराशायी हो गये। पश्चिम बंगाल में भाजपा की हवा तैयार होने के बाद तृणमूल के कई नेता भाजपा में शामिल हुए थे। हालांकि चुनावी नतीजों की बात करें तो यहां भाजपा को बड़ा झटका लगा है। केवल मुकुल राय और शुभेंदु अधिकारी के अलावा भाजपा के सभी बड़े दिग्गज और दलबदलू पूरी तरह धराशायी हो गये।
बाबुल सुप्रियो : टॉलीगंज विधानसभा की सीट से भाजपा ने अपने केंद्रीय मंत्री और सांसद बाबुल सुप्रियो को चुनावी मैदान में उतारा था। हालांकि भाजपा का यह दाव गलत साबित हुआ। इस सीट से तृणमूल के अरूप विश्वास ने 96224 से अधिक वोटों से लीड किया जबकि भाजपा के बाबुल सुप्रियो ने केवल 48365 वोटों से ही लीड किया। यहां से बाबुल सुप्रियो लगभग 47,859 से अधिक मतों से चुनाव हार गये।

लॉकेट चटर्जी : हुगली से भाजपा की सांसद लॉकेट चटर्जी को चुंचुड़ा की सीट से भाजपा ने उतारा था। उनके सामने तृणमूल के असित मजूमदार चुनावी मैदान में खड़े थे जिन्होंने 83873 से अधिक वोटों से लीड किया। वहीं लॉकेट चटर्जी ने 75959 से अधिक वोटों से लीड किया। 7,000 से अधिक वोटों से असित मजूमदार ने भाजपा की हेवीवेट उम्मीदवार को हराया।
स्वपन दासगुप्ता : भाजपा के राज्यसभा सांसद और पार्टी के दिग्गज नेता स्वपन दासगुप्ता को भी हार का सामना करना पड़ा। तारकेश्वर की सीट से चुनाव लड़ रहे स्वपन दासगुप्ता ने 73016 से अधिक वोटों से लीड किया जबकि तृणमूल के रमेंदु सिन्हा रॉय को 76981 से अधिक वोटों से लीड किया।
अनिर्वान गांगुली : भाजपा के हेवीवेट उम्मीदवारों में डॉ. अनिर्वान गांगुली भी हैं जो बोलपुर से चुनाव हार गये। बोलपुर में चंद्रनाथ सिन्हा ने 51558 से अधिक वोटों से लीड किया जबकि भाजपा उम्मीदवार डॉ. अनिर्वान गांगुली ने 27717 से अधिक वोटों से लीड किया।
कल्याण चौबे : भाजपा के टिकट से लोकसभा चुनाव लड़ने वाले कल्याण चौबे को इस बार मानिकतला से भाजपा ने टिकट दिया था, लेकिन तृणमूल के साधन पाण्डे के सामने उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
राजीव बनर्जी : भाजपा के हेवीवेट के बाद अब दलबदलुओं की बात करें तो तृणमूल से भाजपा में आये राजीव बन​र्जी डोमजूड़ की सीट से भाजपा के टिकट से चुनावी मैदान में उतरे थे। तृणमूल उम्मीदवार कल्याण घोष ने यहां से 78538 से अधिक वोटों से लीड किया जबकि भाजपा के राजीव बनर्जी ने केवल 47485 मतों से लीड किया।
वैशाली डालमिया : बाली के टिकट से चुनाव लड़ने वाली और तृणमूल से भाजपा में आयी वैशाली डालमिया को भी हार का सामना करना पड़ा। बाली से तृणमूल उम्मीदवार राणा चटर्जी ने 39159 वोटों से लीड किया तो वहीं भाजपा की वैशाली डालमिया ने 34893 वोटों से लीड​ किया।
रथीन चक्रवर्ती : तृणमूल से भाजपा में आये रथीन चक्रवर्ती को शिवपुर से भाजपा ने टिकट दिया था। हालांकि चुनाव में तृणमूल उम्मीदवार मनोज तिवारी के सामने उन्हें हार का सामना करना पड़ा। यहां मनोज तिवारी को 92048 वोट मिले जबकि रथीन को 59574 वोट मिले।
सव्यसाची दत्ता : विधाननगर से चुनाव लड़ रहे सव्यसाची दत्ता को तृणमूल के हेवीवेट सुजीत बोस के सामने हार का सामना करना पड़ा। यहां से भाजपा के सव्यसाची दत्ता को 46907 वोटों से लीड मिला जबकि तृणमूल के सुजीत बोस को 52392 वोटों से लीड मिला।
रवींद्रनाथ भट्टाचार्य : सिंगुर की सीट नहीं मिलने के कारण रवींद्र नाथ भट्टाचार्य ने तृणमूल छोड़ भाजपा का दामन थामा था। इस सीट से उन्हें भाजपा ने टिकट दिया था, लेकिन इस सीट को तृणमूल से वह नहीं छीन पाये। तृणमूल के बेचाराम मान्ना को 99852 वोट मिले जबकि भाजपा के रवींद्र नाथ भट्टाचार्य को 74595 वोट मिले। यहां रवींद्र नाथ भट्टाचार्य को 25,257 वोटों से हार का सामना करना पड़ा।
सिर्फ मुकुल राय, सुवेन्दु अधिकारी जीते, मुकुल के लड़के शुभ्रंशु राय भी हारे

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