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कारखानों के बंद होने से पशुआहार का संकट

अजमेर: राजस्थान में राज्य की सहकारी क्षेत्र के पशुआहार का उत्पादन करने वाले कारखाने पिछले चार दिनों से बंद पड़े हैं जिसके चलते लाखों पशुपालकों को पशु आहार उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इस मामले में पशुओं और पशुपालकों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए अजमेर डेयरी के छठी बार नवनिर्वाचित अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का इस ओर ध्यान आकर्षित किया है और तुरंत प्रभाव से इन कारखानों में उत्पादन शुरु करके आपूर्ति की मांग की है। उन्होंने कहा कि राजस्थान कॉपरेटिव डेयरी फेडरेशन द्वारा समय पर कच्चे माल का टेंडर नहीं करने और कारखानों में कच्चा माल समाप्त हो जाने के कारण राज्य के लाखों पशुपालक प्रभावित हो रहे हैं। वर्तमान में राज्य में आरसीडीएफ के अधीन अजमेर, जोधपुर, पाली, भीलवाड़ा, जयपुर, भरतपुर और बीकानेर में सहकारी क्षेत्र के सात पशु आहार कारखाने हैं जो चार दिन से बंद हैं। उधर श्री चौधरी के इस ओर ध्यान खींचने के बाद कॉपरेटिव फेडरेशन हरकत में आया और टेंडर निकालने की कार्रवाई शुरु कर दी। शुक्रवार को टेंडर प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है। संभवत: 24 अप्रैल से युद्धस्तर पर पशु आहार का उत्पादन शुरु हो जायेगा, इसके बाद अगले सप्ताह तक पशु आहार की स्थिति सामान्य हो सकेगी। उल्लेखनीय है कि कोरोना वैश्विक महामारी की आड़ में कच्चा माल सप्लाई करने वालों ने बिनौला खल एवं ग्वार कोरमा पर लगभग एक हजार रुपये प्रति ंिक्वटल अचानक रेट बढ़ाने से स्थिति विषम हो गई है और फैक्ट्रियों के लिए विकट समस्या खड़ी हो गई है। बावजूद इसके राजस्थान कॉपरेटिव डेयरी फेडरेशन के वित्तीय सलाहकार लखपत मीणा ने विश्वास दिलाया है कि ऊंची दर पर ही शीघ्र कच्चा माल खरीदकर प्रदेश की उक्त सभी जिलों की सातों फैक्ट्रियों को चालू करेंगे जिससे पशुपालकों की समस्या का शीघ्र समाधान हो सके। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि कच्चे माल की दर बढ़ने के बावजूद पशुपालकों के लिए पशु आहार की दरों में कोई बदलाव नहीं करेंगे।

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