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आजादी के 74 वर्षो के बाद भी लोयाबाद का एक गांव है प्यासा

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नदी- नालों पर निर्भर है लोग
सिस्टम से लड़कर थक चुके हैं ग्रामीण पर नही मिला पानी
लोयाबाद: आजादी के 74 वर्षो के बाद भी लोयाबाद का एक गांव है जो प्यासा है। यहां के लोग बूंद बूंद के लिए दर दर की ठोकरे खा रहा है। नगर निगम के वार्ड संख्या 8 में पड़ने वाला लोयाबाद स्टेशन रोङ के करीब पांच सौ घर पानी के लिए तरस रहे हैं। पार्षद,मेयर सहित विधायक सांसद के घरों पर यहां के लोग चक्कर काट कर थक चुके हैं। यहां के ग्रामीणों की माने तो आज तक पेयजल को लेकर किसी विभाग ने दिलचस्पी नही दिखाई। एक धरोहर के रूप मे भी चापानल यहां नही मिलेगा। यहां के लोग नदी नालों पर निर्भर है जो गर्मी की दस्तक देते ही सुख जाता है। गर्मी में पानी की समस्या दो गुनी हो जाती है। लोग बीमार भी रहते है तो भी पानी दूर से ढोकर लाते है। 2012 में पीएचईडी विभाग को भी पत्र दिया गया। लेकिन कोई फर्क नही पड़ा। जिसको लेकर बुधवार को गांव के पास ही दर्जनों महिला पुरषों ने हाथों में बर्तन लेकर प्रर्दशन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रर्दशन करने वालो मे जयप्रकाश यादव,महताब आलम,कालीचरण दास,मुन्ना झा,आदित्य कर्मकार,दोश मोहम्मद,अजय यादव,कमलेश विश्वकर्मा धर्मेन्द्र विश्वकर्मा,गुलाम अंसारी,अनंद लायक,सतीश दत्ता,बब्लू अंसारी,राजवल्लभ यादव सहित शामिल दर्जनो महिला पुरुष ने कहा कि 6 अप्रैल को धनबाद डीसी के जनता दरबार मे आवेदन दिया गया। डीसी ने नगर आयुक्त को मामले पर संज्ञान लेने को कहा है।इसके बाद भी ग्रामीणों को भरोसा नही है कि उन्हें पानी मिल पायेगा। ग्रामीणों ने एक बुक का हवाला देते हुए कहा कि 89 प्रतिशत नल से पानी तमिलनाडू की जनता को मिलता है। गोवा 96 प्रतिशत,हिमाचल 84 प्रतिशत,बाकी राज्य जैसे उत्तर प्रदेश,बिहार,बंगाल एवं झारखंड की औसतन 10 प्रतिशत भी यहां नल से पानी नही सप्लाई की जाती है।ये दुर्भाग्यपूर्ण है।

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