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अकीदत के साथ पढ़ी गई जुमे की नमाज

रहमतों व बरकतों का महीना है रमजान: कासमी
मेदिनीनगर: जिले के मेदिनीनगर शहर समेत जिले भर में रमजान का पहला जुमे की नमाज अकीदत के साथ पढ़ी गई। शहर के जामा मस्जिद, छोटी मस्जिद, पहाड़ी मोहल्ला स्थित नूरी मस्जिद, कुंड मूहल्ला स्थित मिल्लत मस्जिद एवं मुस्लिमनगर स्थित मदीना मस्जिद समेत सभी मस्जिदों में जूमे की नमाज सरकार के गाइडलाइन का पालन करते हुए अदा की गई। जामा मस्जिद के पेशइमाम मुफ्ती मोहम्मद शाहनवाज कासमी ने बताया कि रहमतों व बरकतों का महीना रमजान शुरू हो गया है। अल्लाह ने फरमाया लोगों पर रोजा फर्ज किया गया है। अल्लाह के नबी सल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया जिसने रमजान के रोज रखे उसके पिछले गुनाह माफ कर दिए जाते है। रमजान में ज्यादा से ज्यादा सदका व खैरात करना चाहिए। नबी स.अ. ने फरमाया रमजान में सदका करना सबसे अफजल है। उन्होंने बताया कि रमजान उल मुबारक के महीने में नफिल नमाज का फर्ज बराबर सवाब होता है और फर्ज नमाज 70 फर्ज के बराबर सवाब होता है। यह महीना नेकियों व खैरो-बरकत का महीना है। मौलाना रिजवान कासमी ने बताया कि रमजान में कुरान पाक को अल्लाह ने नाजिल किया। कुरान पाक के तिलावत के एक-एक हुरफ पर 10-10 नेकिया है। कुरान की तिलावत ज्यादा से ज्यादा करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि रोजेदार को अफ्तर कराना चाहिए। रोजेदार को अफ्तार कराने पर बराबर सवाब होता है। मौलाना रिजवान कासमी ने बताया कि रोजा रखने से तकवा और परहेजगारी आती है। तक्वा और परहेजगारी से अल्लाह का नेक बंदा बन जाता है। अल्लाह ताला का डर पैदा हो जाता है। उन्होंने बताया कि रोजा रखने वाले दुनिया से बच कर खा सकता है पी सकता है, लेकिन दिल में एक डर रहता है कि अल्लाह देख रहा है। रोजा खत्म हो जाएगा गुनाह होगा।

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