हरियाणा : गुरुग्राम में ईडी की कार्रवाई, अंसल हब-83 से जुड़ी 82 करोड़ की संपत्ति अस्थायी रूप से अटैच

Shashi Bhushan Kumar

गुरुग्राम में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत सेक्टर-83 स्थित ‘अंसल हब-83’ नामक कमर्शियल प्रोजेक्ट से संबंधित करीब 82 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है।

यह परियोजना लगभग 19 कनाल 15 मरला (करीब 2.47 एकड़) क्षेत्र में फैली हुई है, जिसमें 147 दुकानों, 137 कार्यालय इकाइयों और दो रेस्टोरेंट स्पेस का प्रावधान है। ईडी की यह कार्रवाई हरियाणा पुलिस द्वारा जून 2023 में दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई है। एफआईआर में भारतीय दंड संहिता की धाराओं 120-बी, 406 और 420 के तहत मेसर्स अंसल हाउसिंग लिमिटेड (पूर्व में अंसल हाउसिंग एंड कंस्ट्रक्शन लिमिटेड) के प्रमोटर्स और वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

जांच के दायरे में कंपनी के फुल-टाइम डायरेक्टर कुशाग्र अंसल के साथ-साथ संबंधित कंपनियां — मेसर्स सम्यक प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स आकांक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड — भी शामिल हैं। यह मामला ‘अंसल हब-83 अलॉटी वेलफेयर एसोसिएशन’ की शिकायत के बाद सामने आया, जो एक हजार से अधिक निवेशकों का प्रतिनिधित्व करती है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि निवेशकों को भ्रामक वादों के आधार पर परियोजना में निवेश के लिए प्रेरित किया गया।

जांच में यह तथ्य सामने आया कि आवश्यक वैधानिक मंजूरियां प्राप्त किए बिना ही परियोजना की व्यावसायिक इकाइयां बेची गईं। परियोजना का लाइसेंस दिसंबर 2015 में समाप्त हो गया था, लेकिन आरोप है कि बिना नवीनीकरण के ही सितंबर 2023 तक धन संग्रह और बिक्री जारी रही।

कई निवेशकों ने हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (HRERA) में भी शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतों में समय पर कब्जा न देने, परियोजना अधूरी रहने, नियमों के उल्लंघन और अवैध रूप से धन जुटाने जैसे आरोप शामिल थे। निवेशकों को तय समयसीमा में पजेशन और बेहतर सुविधाएं देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन लंबे समय बीत जाने के बाद भी ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी नहीं हुआ।

ईडी के अनुसार, वर्ष 2011 से 2023 के बीच निवेशकों से 82 करोड़ रुपये से अधिक राशि एकत्र की गई। आरोप है कि इस धन का उपयोग परियोजना को पूरा करने के बजाय अन्य कार्यों और निजी लाभ के लिए किया गया। एजेंसी ने परियोजना से जुड़ी जमीन और निर्माण को अस्थायी रूप से अटैच कर दिया है, ताकि संपत्ति के हस्तांतरण या बिक्री पर रोक लगाई जा सके और आगे की कानूनी कार्रवाई प्रभावित न हो।

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शशी भूषण कुमार | पत्रकार (Journalist)- शशी भूषण कुमार 12+ वर्षों के अनुभव वाले पत्रकार हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में कार्य करते हुए वर्तमान में Live 7 TV.com में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में संपादकीय नेतृत्व और न्यूज़ प्लानिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे पिछले तीन वर्षों से झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता विभाग के गेस्ट फैकल्टी भी हैं। ग्रामीण पत्रकारिता पर शोध कार्य से जुड़े रहते हुए वे जमीनी और आदिवासी क्षेत्रों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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