20 फरवरी को असम में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम–II का शुभारंभ करेंगे अमित शाह

Shashi Bhushan Kumar

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 20 फरवरी को असम में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम–II (वीवीपी–II) का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। यह कार्यक्रम सीमावर्ती गांवों के समग्र और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इसका उद्घाटन असम के कछार जिले के नाथनपुर गांव में किया जाएगा।

वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम–II को इस उद्देश्य से तैयार किया गया है कि सीमांत क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ किया जाए, आवश्यक सेवाओं की पहुंच बढ़ाई जाए और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर विकसित किए जाएं। यह योजना संतृप्ति आधारित और समन्वित दृष्टिकोण पर आधारित है, ताकि सीमावर्ती गांवों का व्यापक विकास सुनिश्चित हो सके। कार्यक्रम ‘विकसित भारत 2047’ की परिकल्पना के अनुरूप सुरक्षित और समृद्ध सीमाई समुदायों को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखता है।

इस पहल का एक उद्देश्य सीमावर्ती आबादी को सशक्त बनाना भी है, ताकि वे सीमा सुरक्षा और अवैध गतिविधियों की रोकथाम में सहयोगी भूमिका निभा सकें। इससे आंतरिक सुरक्षा को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

यह एक केंद्रीय योजना है, जिसके लिए वित्त वर्ष 2028-29 तक 6,839 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। योजना को 15 राज्यों और 2 केंद्रशासित प्रदेशों में लागू किया जाएगा।

कार्यक्रम से पहले गृह मंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि यह योजना सीमावर्ती गांवों के विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाएगी। उन्होंने उल्लेख किया कि पहले चरण में इस पहल के माध्यम से कई गांवों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई गईं, पलायन में कमी आई और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती मिली। दूसरे चरण में इन प्रयासों का विस्तार और अधिक गांवों तक किया जाएगा।

वहीं, असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने भी राज्य में इस कार्यक्रम के आयोजन को लेकर उत्साह व्यक्त किया और कहा कि यह पहल राज्य की विकास यात्रा को नई दिशा देगी। गृह मंत्री 21 फरवरी को सीआरपीएफ दिवस समारोह में भी भाग लेंगे।

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शशी भूषण कुमार | पत्रकार (Journalist)- शशी भूषण कुमार 12+ वर्षों के अनुभव वाले पत्रकार हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में कार्य करते हुए वर्तमान में Live 7 TV.com में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में संपादकीय नेतृत्व और न्यूज़ प्लानिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे पिछले तीन वर्षों से झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता विभाग के गेस्ट फैकल्टी भी हैं। ग्रामीण पत्रकारिता पर शोध कार्य से जुड़े रहते हुए वे जमीनी और आदिवासी क्षेत्रों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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